Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Write
Notifications
Wall of Fame
May 23, 2022 · 2 min read

कविता ” बोध “

[ प्रतियोगिता हेतु विषय-पिताजी ]

बोध… (कविता)

“””””””””””””””””””

मैं
विचलित था
बरसों से, ये सोचकर
तुम छोड़ गये, मुझे
अकेला
इस भीड़ भरे संसार में
मैं भी कैसा अबोध
बहाता रहा नदियाँ
आँखों से,
और ढूंढ़ता रहा तुम्हें,
उन स्मृतियों में/
उन स्थानों पर,
जहाँ तुम्हें,
मैंने खोया था
पर , आज जब
तुम्हें पाता हूं मुझमें
तो सोचता हूं
तुम गये नहीं,
ये ‘मैं’ नहीं,
तुम ही तो हो
फर्क कहाँ होता है
अंश और अंशी में…
—————

– व्यग्र पाण्डे
कर्मचारी कालोनी, गंगापुर सिटी,
सवाई माधोपुर (राज.) 322201
मोबाइल नंबर- 9549165579
ई-मेल : vishwambharvyagra@gmail.com
निवेदन : उक्त कविता मेरी मौलिक व अप्रकाशित रचना है ।

रचनाकार का घोषणा पत्र-

इस प्रतियोगिता में मेरे द्वारा (व्यग्र पाण्डे द्वारा) सम्मलित सभी रचनाएं मेरी स्वरचित एवं मौलिक रचनाएं है जिनको प्रकाशित करने का कॉपीराइट मेरे पास है और मैं स्वेच्छा से इन रचनाओं को साहित्यपीडिया की इस प्रतियोगिता में सम्मलित कर रहा हूँ।
मैं (व्यग्र पाण्डे) साहित्यपीडिया को अपने संग्रह/पुस्तक में इन्हे प्रकाशित करने का अधिकार प्रदान करता हूँ।
मैं इस प्रतियोगिता के एवं साहित्यपीडिया पर रचना प्रकाशन के सभी नियम एवं शर्तों से पूरी तरह सहमत हूँ। अगर मेरे द्वारा किसी नियम का उल्लंघन होता है, तो उसकी पूरी जिम्मेदारी सिर्फ मेरी होगी।
साहित्यपीडिया के काव्य संग्रह में अपनी इस रचना के प्रकाशन के लिए मैं साहित्यपीडिया से किसी भी तरह के मानदेय या भेंट की पुस्तक प्रति का/की अधिकारी नहीं हूँ और न ही मैं इस प्रकार का कोई दावा करूँगा/करुँगी।
अगर मेरे द्वारा दी गयी कोई भी सूचना ग़लत निकलती है या मेरी रचना किसी के कॉपीराइट का उल्लंघन करती है तो इसकी पूरी ज़िम्मेदारी सिर्फ और सिर्फ मेरी है, साहित्यपीडिया का इसमें कोई दायित्व नहीं होगा।
मैं समझता हूँ कि अगर मेरी रचनाएं साहित्यपीडिया के नियमों के अनुसार नहीं हुई तो उन्हें इस प्रतियोगिता एवं काव्य संग्रह में शामिल नहीं किया जायेगा; रचनाओं के प्रकाशन को लेकर साहित्यपीडिया टीम का निर्णय ही अंतिम होगा और मुझे वह निर्णय स्वीकार होगा।
– व्यग्र पाण्डे, गंगापुर सिटी (राज.)

33 Views
You may also like:
मानव_शरीर_में_सप्तचक्रों_का_प्रभाव
Vikas Sharma'Shivaaya'
गांव शहर और हम ( कर्मण्य)
Shyam Pandey
बेचारी ये जनता
शेख़ जाफ़र खान
राम
Saraswati Bajpai
मेरे गाँव का अश्वमेध!
ज्ञानीचोर ज्ञानीचोर
सूरज से मनुहार (ग्रीष्म-गीत)
ईश्वर दयाल गोस्वामी
गुरुवर
AMRESH KUMAR VERMA
*अंतिम प्रणाम ! डॉक्टर मीना नकवी*
Ravi Prakash
हे महाकाल, शिव, शंकर।
Taj Mohammad
हरीतिमा स्वंहृदय में
Varun Singh Gautam
फ़ालतू बात यही है
gurudeenverma198
अम्मा/मम्मा
Manu Vashistha
करोना
AMRESH KUMAR VERMA
👌स्वयंभू सर्वशक्तिमान👌
DR ARUN KUMAR SHASTRI
शृंगार छंद और विधाएं
Subhash Singhai
क्यों भिगोते हो रुखसार को।
Taj Mohammad
इंतजार का....
Umesh उमेश शुक्ल Shukla
यूं हुस्न की नुमाइश ना करो।
Taj Mohammad
कालचक्र
"अशांत" शेखर
# तेल लगा के .....
Chinta netam " मन "
मर्द को भी दर्द होता है
सुरेन्द्र शर्मा 'शिव'
अजी मोहब्बत है।
Taj Mohammad
ताकि याद करें लोग हमारा प्यार
gurudeenverma198
यौवन अतिशय ज्ञान-तेजमय हो, ऐसा विज्ञान चाहिए
Pt. Brajesh Kumar Nayak
खुदा बना दे।
Taj Mohammad
स्वयं में एक संस्था थे श्री ओमकार शरण ओम
Ravi Prakash
दिल मुझसे लगाकर,औरों से लगाया न करो
Ram Krishan Rastogi
तुम हो फरेब ए दिल।
Taj Mohammad
मेरे दिल के करीब,आओगे कब तुम ?
Ram Krishan Rastogi
नारी है सम्मान।
Taj Mohammad
Loading...