Oct 3, 2016 · 1 min read

कलम

सूरज की पहली किरण के साथ
कुछ कहने को कुछ लिखने को
लालायित मैं उत्साहित हो उठी
पर कलम चुप थी

कुछ दुनियाँदारी के बोझ तले मैं
कुछ अप्रकट अहसासों मे दबी मैं
अशांत भावनाओं के बेगों में घटी
पर कलम चुप थी

कुछ खोज रही थी शून्य में ताकते
जा टिकी दृष्टि पास पडे अखबार पे
शुरू स्याही बद्ध तथ्यों का मंथन
पर कलम चुप थी

नेह भरी कोमल यादों का चिंतन
अपना सा कहने बाले शब्दों का जादू
शुरू उद्वेगों का मचलकर उठना
पर कलम चुप थी

शब्द भी सिहर कर सिसकने को बेताब थे
आँसू रोकर कहने को अपना हाल बेहाल थे
भावनाओं के वेग में अग्यात दोहरायें पर थे
पर कलम चुप थी

डॉ मधु त्रिवेदी

आगरा

70 Likes · 194 Views
You may also like:
अभी बाकी है
Lamhe zindagi ke by Pooja bharadawaj
कुछ ख़ास करते है।
Taj Mohammad
बाबा ब्याह ना देना,,,
Taj Mohammad
अजीब कशमकश
Anjana Jain
गुरुजी!
Vishnu Prasad 'panchotiya'
किताब...
Umesh उमेश शुक्ल Shukla
बाबू जी
Anoop Sonsi
"वो पिता मेरे, मै बेटी उनकी"
रीतू सिंह
फिक्र ना है किसी में।
Taj Mohammad
मेरे पापा
Anamika Singh
गरीब के हालात
Ram Krishan Rastogi
एक संकल्प
Aditya Prakash
【31】*!* तूफानों से क्यों झुकना *!*
Arise DGRJ (Khaimsingh Saini)
बेटी की मायका यात्रा
Ashwani Kumar Jaiswal
साँप की हँसी होती कैसी
AJAY AMITABH SUMAN
मारुति वंदन
Vishnu Prasad 'panchotiya'
🍀🌺प्रेम की राह पर-51🌺🍀
शिवाभिषेक: 'आनन्द'(अभिषेक पाराशर)
# बोरे बासी दिवस /मजदूर दिवस....
Chinta netam मन
*पुस्तक का नाम : अँजुरी भर गीत* (पुस्तक समीक्षा)
Ravi Prakash
पानी यौवन मूल
Jatashankar Prajapati
मनुज से कुत्ते कुछ अच्छे।
Pt. Brajesh Kumar Nayak
रसीला आम
Buddha Prakash
बिछड़न [भाग१]
Anamika Singh
कन्या रूपी माँ अम्बे
Kanchan Khanna
कविता क्या है ?
Ram Krishan Rastogi
फूलों की वर्षा
Pt. Brajesh Kumar Nayak
अब तो इतवार भी
Krishan Singh
पुस्तक समीक्षा -एक थी महुआ
Rashmi Sanjay
💐प्रेम की राह पर-30💐
शिवाभिषेक: 'आनन्द'(अभिषेक पाराशर)
ढह गया …
Rekha Drolia
Loading...