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कलम आज उनकी जय बोल

विषय–कलम आज उनकी जय बोल

भारती माँ की गोद अनमोल
जब जब क्रूर आंतकी पिपाषा
बढ़ाए
तब तब वीर जवान बन्दूको से
आंतकवादियो को मार गिराए
वीर रस का यह कैसा हिंडोल
कलम आज उनकी जय बोल ।

पावन धरती ,पावन है यहां
सुसंस्कृति
बजते नगाड़े राष्ट्रगान संग ढोल
पढ़ते वीर गाथा ,रचते इतिहास
अनमोल
कलम आज उनकी जय बोल ।

एक माँ अपने जिगर को भेजती
पावन भारती के चरणों पर
हार न माना वो लड़कर भी वो
रणवीर सोया बहते झरनों पर,
देखो राष्ट्र भक्ति की ऊर्जा घोल
कलम आज उनकी जय बोल।

यहाँ की माटी में खिलता है गुलाब
महकता यहाँ शौर्य वीर का सैलाब
बना है यहाँ ऐतिहासिक भूगोल ,
कलम आज उनकी जय बोल।

आ रही है हिमालय से बयार
गाजे बाजे मस्त हो तैयार,
लेकर सन्ध्या को सूरज दिल खोल
कलम आज उनकी जय बोल।

हल्दी घाटी के हुए शिला खण्ड
उस रणभूमि में टूट पड़ी वीरो की
तलवारें ,ढाल ढाल में मचा प्रचंड
हुआ अंग्रजो का घमंड गोल
कलम आज उनकी जय बोल।

सूरदास ,तुलसी ,अथवा कविचन्द
नही
बिजली भर दे अब वह छंद नही
किस पर लिखे हम वीरो की गाथा
जो बन जाए यह वीर रस
अनमोल,,
कलम आज उनकी जय बोल ।

✍प्रवीण शर्मा ताल
स्वरचित मौलिक रचना

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