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Aug 1, 2022 · 1 min read

‘कभी तो’

कभी तो भूले भटके इस राह से भी गुज़रा करो,
कि एक रास्ता तुम्हारे घर का यहाँ से रोज़ गुज़रता है।

2 Comments · 65 Views
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