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और बताओ बोले क्या?

भाषणबाजी हो आतिशबाजी, नहीं कोई अंतर है।
हो सके तो याद ये रखना, यही जीत का मन्तर है।।
कथनी करनी का अंतर, जीवन में रंग लाएगा।
सच्चाई की बात किया तो, बहुत मार खायेगा।।
जैसा कहते हैं कर डालो, नाहक जिद नासमझी है।
काट पीट करे सिलाई, लाशों के वो दरजी है।।
तेरी मरजी नहीं चलेगी, चाहे दे लो अरजी है।
नया जमाना आया है, यहाँ काम सब फरजी है।।
बेमतलब की बकबक झकझक, बकना बकरे जैसा है।
नखरे के लिए नहीं ही कहना, मिलने वाला पैसा है।।
बनता काम बिगड़ जाएगा, सही कहा थोड़ा थोड़ा।
सही बात को नहीं ही कहना, सही ज़माने का रोड़ा।।
सच्चाई की पैरवी, कौन करेगा आकर के?
मुँह दिखायेगा कैसे, बेवजह मात वो खाकरके।।
जानवार हैं आप सभी, कुछ भी कहता नहीं नया।
समझाने को नहीं बचा है, और बताओ बोले क्या?

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