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ओजोन परत

मनीभाई की कविता

ओजोन परत
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(16 सितंबर विश्व ओजोन दिन विशेष)
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सूरज है आग का गोला ।
जलता है ,बनकर शोला ।
किरणों में है ,पराबैंगनी ।
सबके लिए ,घातक बनी।

धन्यभाग, हम मानव का।
जो कवच है इस धरा का।
ओज़ोनपरत वो कहलाए।
घातक किरणें आ ना पाए।

आज छेद होने का है डर ।
भोग विलास का है असर ।
एसी फ्रिज उर्वरक से रिसे।
क्लोरोफ्लोरोकार्बन  गैसें ।

यह नहीं, पानी में घुलती ।
पर्त में सीधे हमला करती।
जहर ओजोनछिद्र बनाता।
पराबैंगनी सीधे धरा आता।

फैले कैंसर ,चर्म-नेत्र रोग ।
हाहाकार करते सब लोग ।
नहीं खतरा एक ही देश को।
चेतावनी है मानव लोक को।

प्रदूषण कम करें,बचायें जान।
मिलजुल कोशिश से आसान।
संभलजा तू! अभी मुमकिन ।
कहे16 सितंबर ओजोन दिन।
(?मनीभाई)

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