Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings

एक विशाल बरगद के साये

एक विशाल बरगद के साये।
जब दो पग नन्हें से आये।।
विस्मित होकर देख रहे थे।
चंचल मन-नैना अकुलाये।।
सम्मुख वह वट वृक्ष तना था।
कौतुहल में बालमना था।
मन भीतर इक भय अज्ञात था।
सम्मुख गिरि के लघुगात था।
फिर सकुचाते कदम बढ़ाये।
मिटे मिथक सब बने बनाये।।
जो भी शरणागत हो आता।
वृक्ष छाँव सघन बरसाता।।
अनुभव के पत्ते सजे डाल थे।
दो कर जुड़े,बस निहाल थे।।
दो कर जुड़े,बस निहाल थे…….
✍हेमा तिवारी भट्ट✍

294 Views
You may also like:
सफलता कदम चूमेगी
सुरेन्द्र शर्मा 'शिव'
आस
लक्ष्मी सिंह
✍️कैसे मान लुँ ✍️
Vaishnavi Gupta
पिता
विजय कुमार 'विजय'
Blessings Of The Lord Buddha
Buddha Prakash
यकीन कैसा है
Dr fauzia Naseem shad
जीवन में
Dr fauzia Naseem shad
पिता के चरणों को नमन ।
Buddha Prakash
गुमनाम मुहब्बत का आशिक
श्री रमण 'श्रीपद्'
गाँव की साँझ / (नवगीत)
ईश्वर दयाल गोस्वामी
" मां" बच्चों की भाग्य विधाता
rubichetanshukla रुबी चेतन शुक्ला
माँ (खड़ी हूँ मैं बुलंदी पर मगर आधार तुम हो...
Dr Archana Gupta
मुझे तुम भूल सकते हो
Dr fauzia Naseem shad
साधु न भूखा जाय
श्री रमण 'श्रीपद्'
सपनों में खोए अपने
सुरेन्द्र शर्मा 'शिव'
सो गया है आदमी
कुमार अविनाश केसर
अमर शहीद चंद्रशेखर "आज़ाद" (कुण्डलिया)
ईश्वर दयाल गोस्वामी
बदल जायेगा
शेख़ जाफ़र खान
दोहे एकादश ...
डॉ.सीमा अग्रवाल
✍️इतने महान नही ✍️
Vaishnavi Gupta
जब भी तन्हाईयों में
Dr fauzia Naseem shad
✍️रास्ता मंज़िल का✍️
Vaishnavi Gupta
कण-कण तेरे रूप
श्री रमण 'श्रीपद्'
फूल और कली के बीच का संवाद (हास्य व्यंग्य)
Anamika Singh
फौजी बनना कहाँ आसान है
Anamika Singh
जय जगजननी ! मातु भवानी(भगवती गीत)
मनोज कर्ण
Nurse An Angel
Buddha Prakash
जाने कैसा दिन लेकर यह आया है परिवर्तन
आकाश महेशपुरी
मेरे साथी!
Anamika Singh
रूखा रे ! यह झाड़ / (गर्मी का नवगीत)
ईश्वर दयाल गोस्वामी
Loading...