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27 Oct 2016 · 1 min read

इस दिवाली पर

*** इस दिवाली पर **
—————————
प्रेम का एक दीपक जलाना ,
इस दिवाली पर ।
रोशनी को छोड़ना तू,
किसी बेबस की थाली पर ।
आज जो महलों में बैठे,
वो दीप क्या जलाएँगें ।
किसी झोपड़ी की दुर्दशा पर,
अक्सर वो मुस्काएँगे ।
इक दिया जला देना,
उनकी इस लाचारी पर ।
प्रेम का दीपक ……

सरहद पर जो वीर सिपाही,
वो कहाँ दीप जलाएँगे ।
तुम्हारे इक दिया की खातिर,
जांन दाव पे लगाएँगे ।
मां भी उनके इंतजार में,
बैठी होगी द्वार पर ।
आशाएं फिर भी अमर हैं,
उन दोनों के प्यार पर ।
सभी दिए समर्पित मेरे,
शहीद खूनों की लाली पर ।
प्रेम का दीपक …..

—— प्रियांशु कुशवाहा,
डिग्री कालेज, सतना (म.प्र)
मो. 9981153574

Language: Hindi
1 Like · 327 Views
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