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18 May 2023 · 1 min read

इश्क़ में

है नहीं ये रस्ता आसान
अपनी ज़िंदगी को मेहमान रखते हैं
जो बदले में कुछ नहीं चाहते
वही इश्क़ को सँभालकर रखते है

है नहीं ये कला उनकी
वो सब जानते हैं
जो होते हैं इश्क़ में
वो सिर्फ़ इश्क़ जानते हैं

आग से जलने का डर नहीं
ठंड में जमने का कोई भय नहीं
है इतनी ताक़त इश्क़ में
ज़माने की नज़रों का भय नहीं

किसी के लिए नफ़रत नहीं
महबूब के नयनों में ब्रह्मांड वहीं
देता है आनंद ऐसा ये इश्क़
जो मिलता नहीं है और कहीं

हो अगर महबूब सामने तो
कुछ और नहीं चाहिए उसे
बरसों लगे जिसे ढूँढने में
वो सुकून मिल जाता है उसे

मैं नहीं जानता क्या चाहिए तुम्हें
हमारी तो चाहतें कभी ख़त्म नहीं होती
जो है इश्क़ में उसे तो बस महबूब चाहिए
महबूब को देखे बिन उसकी आँखें नहीं सोती।

7 Likes · 2 Comments · 3141 Views
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