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सहारा मिल गया होता

आधार गीत मुक्तक
———————–
मिरे हमराह चलने का इशारा मिल गया होता
इन आँखों को कोई दिलकश नजारा मिल गया होता
भले झूठा दिलासा दे के मुझको तू चला जाता
मुझे तेरी मुहब्बत का सहारा मिल गया होता

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