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30 Jul 2022 · 1 min read

‘इरशाद’

एक शायरी तेरी हमको याद आई,
वो न आए पर याद बरसों बाद आई।
भूल ही गए थे तेरी उल्फ़त के सिले,
कि नज़्म तेरी बनके इरशाद आई।

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