Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
26 Aug 2016 · 1 min read

इक फूल को छूने के लिए हाथ बढ़ाया

इक फूल को छूने के लिए हाथ बढ़ाया
गुलशन में अनादिल नें बहुत शोर मचाया

मुझको शबे-ए-फुरक़त में तेरी याद जो आयी
मैंने तेरी तस्वीर को सीने से लगाया

जाते ही ख़िज़ां झूमती आईं जो बहारें
ख़ुशरंग परिंदों ने नशेमन को सजाया

एक हुस्न-ए -इत्तफ़ाक़ समझ लीजिये इसको
नफरत थी मुझे जिससे वही काम भी आया

हमदर्दी जताने को वही आये हुए हैं
जिन लोगों ने मिल जुल के मेरे घर को जलाया

जब सख़्त घड़ी कोई भी आयी है वतन पर
हमने भी हिफ़ाज़त के लिए ख़ून बहाया

आ जाएगी नींद अब तो यक़ीनन तुझे ‘ग़ाज़ी’
सर पर है तेरे उसकी हसीं ज़ुल्फ़ का साया

Meanings :
अनादिल- बुलबुलें(पंछी)
नशेमन- घोंसला
शबे-ए-फुरक़त- जुदाई की रात

1 Comment · 258 Views
You may also like:
थिरकते पाँव (बाल कविता)
Ravi Prakash
प्रभु आशीष को मान दे
Saraswati Bajpai
कलाकार की कला
Skanda Joshi
जब उम्मीदों की स्याही कलम के साथ चलती है।
Manisha Manjari
दर्द का अंत
AMRESH KUMAR VERMA
💔💔...broken
Palak Shreya
ख्वाब को बाँध दो
Anamika Singh
मुक्तक: युद्ध को विराम दो.!
Prabhudayal Raniwal
तिरंगा मन में कैसे फहराओगे ?
ओनिका सेतिया 'अनु '
Freedom
Aditya Prakash
गुनाहों का सज्जा क्या दु
Anurag pandey
साँझ ढल रही है
अमित नैथानी 'मिट्ठू' (अनभिज्ञ)
हायकु
डॉ प्रवीण कुमार श्रीवास्तव, प्रेम
मज़हबी उन्मादी आग
Dr. Kishan Karigar
सैफई रहा केन्द्र
महावीर उत्तरांचली • Mahavir Uttranchali
काफ़िर जमाना
सोलंकी प्रशांत (An Explorer Of Life)
प्रतिस्पर्धा
नंदलाल मणि त्रिपाठी पीताम्बर
जिंदगी देखा तुझे है आते अरु जाते हुए।
सत्य कुमार प्रेमी
कभी बेबसी को समझो
Dr fauzia Naseem shad
आँखों की बरसात
Dr. Sunita Singh
अपनों से न गै़रों से कोई भी गिला रखना
Shivkumar Bilagrami
जलियांवाला बाग
Shriyansh Gupta
खुशबू
DESH RAJ
शृंगार छंद और विधाएं
Subhash Singhai
'फौजी होना आसान नहीं होता"
Lohit Tamta
ये चुनी हुई चुप्पियां
Shekhar Chandra Mitra
पिता घर की पहचान
vivek.31priyanka
सच्चा शिक्षक
gurudeenverma198
कश्ती को साहिल चाहिए।
Taj Mohammad
✍️13/07 (तेरा साथ)✍️
'अशांत' शेखर
Loading...