Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
Sep 15, 2017 · 1 min read

=**इक दूजे के लिए **=

न उनके बिन कोई जिन्दगी है तुम्हारी,
न बिन तुम्हारे कहीं उनका गुजारा।
तुम नहीं है तो उनकी हर रात अंधेरी,
सूना-सूना सा लगे उन्हें हरेक सवेरा।

बिना उनके न वजूद अब तुम्हारा,
तुम्हारे बगैर उनका अस्तित्व नकारा।
तुम्हारी आत्मा उनमें ही है बसती,
बिना उनके न तुम्हारी कोई हस्ती।

उनके ह्रदय की धड़कन हो तुम यारा,
साथ तुम्हारा उन्हें प्राणों से भी प्यारा।
उनकी मन वीणा की तुम सरगम,
वो है वह गीत जिस का हो सुर तुम।

न तुम बिन उनका कोई तीरा,
न उनके बिन तुम्हारा कोई किनारा।
बताए कोई यह अनबूझी पहेली,
कर रहे हैं हम किसकी तरफ इशारा ।

कोई बताए क्या है ये रिश्ता निराला,
इक अटूट बंधन में बंधा है।
तुम्हारा और उनका ये नाता न्यारा,
ईश्वर ने ही जिन्हें किया एकाकार।

सुखी दाम्पत्य की है यही पूंजी,
यह है पति-पत्नी का रिश्ता प्यारा ।
हो नोंक-झोंक या हो प्यार की झिड़की,
अमूल्य है साथ में जो भी वक्त गुजारा।

——रंजना माथुर दिनांक 13/07/2017
मेरी स्व रचित व मौलिक रचना
©

186 Views
You may also like:
समय ।
Kanchan sarda Malu
ठोडे का खेल
सुरेन्द्र शर्मा 'शिव'
मां की महानता
Satpallm1978 Chauhan
सफ़र में रहता हूं
Shivkumar Bilagrami
बेरोज़गारों का कब आएगा वसंत
Anamika Singh
हो मन में लगन
सुरेन्द्र शर्मा 'शिव'
पिता
नवीन जोशी 'नवल'
जो दिल ओ ज़ेहन में
Dr fauzia Naseem shad
राष्ट्रवाद का रंग
मनोज कर्ण
क्यों भूख से रोटी का रिश्ता
Dr fauzia Naseem shad
रात तन्हा सी
Dr fauzia Naseem shad
फिर भी वो मासूम है
सुरेन्द्र शर्मा 'शिव'
बच्चों के पिता
Dr. Kishan Karigar
गरम हुई तासीर दही की / (गर्मी का नवगीत)
ईश्वर दयाल गोस्वामी
उतरते जेठ की तपन / (गर्मी का नवगीत)
ईश्वर दयाल गोस्वामी
मत रो ऐ दिल
Anamika Singh
बेरूखी
Anamika Singh
मेरा खुद पर यकीन न खोता
Dr fauzia Naseem shad
फूल और कली के बीच का संवाद (हास्य व्यंग्य)
Anamika Singh
पिता
Deepali Kalra
बाबूजी! आती याद
श्री रमण 'श्रीपद्'
मुझे तुम भूल सकते हो
Dr fauzia Naseem shad
मिसाले हुस्न का
Dr fauzia Naseem shad
विचार
साहित्य लेखन- एहसास और जज़्बात
यही तो इश्क है पगले
सुरेन्द्र शर्मा 'शिव'
✍️बदल गए है ✍️
Vaishnavi Gupta
रहे इहाँ जब छोटकी रेल
आकाश महेशपुरी
पितृ स्वरूपा,हे विधाता..!
मनोज कर्ण
ठोकरों ने समझाया
Anamika Singh
ग़ज़ल
सुरेखा कादियान 'सृजना'
Loading...