Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
26 Jul 2016 · 1 min read

इक घर अपना भी बने प्यारा,,,,

26.07.16
इक घर अपना भी बने प्यारा,,,

इक तिनका आज फिर लायी हूँ
नीड़ फिर नया इक बनाई हूँ
यादों का तिनका एक भी नहीं
न ही कोई तिनका है आशाओं का
आज और आज के ही सारे तिनके
चुन चुन कर बामुश्किल लायी हूँ
नीड़ फिर नया इक बनाई हूँ ,,,,
*
सपनों का सूरज यहाँ नहीं चमकता
न ही आता चंदा इरादों की चांदनी लिए
माँ की ममता का दीप बस जलता यहाँ
ख़ुशी का ही हरसूँ उजियारा खिले
दुःख का अँधेरा यहाँ अब न मिले
मकाँ बनाया नहीं अब तो हमने
घर ही घर चारसूं बस सजाया है ,,,
*
इक तिनका आज फिर लायी हूँ
नीड़ फिर नया इक बनाई हूँ
खुद संग खुदा को भी ठहराई हूँ
मानवता के देव भी बैठाई हूँ
ज्ञान का दोस्त करता है चौकीदारी
छोटी सी प्यारी सी दुनिया ये हमारी
इक तिनका आज फिर लायी हूँ
नीड़ फिर नया इक बनाई हूँ,,,

**** शुचि(भवि)****

Language: Hindi
Tag: कविता
167 Views
You may also like:
मैं बेटी हूँ
लक्ष्मी सिंह
भारत के बुद्धिजीवी
Shekhar Chandra Mitra
ये वो नहीं है .....!
Buddha Prakash
मुक्तक
Dr Archana Gupta
पश्चाताप
नंदलाल मणि त्रिपाठी पीताम्बर
पिता
पूनम झा 'प्रथमा'
गुमनाम ही रहने दो
VINOD KUMAR CHAUHAN
✍️✍️ओढ✍️✍️
'अशांत' शेखर
#क्या_पता_मैं_शून्य_हो_जाऊं
D.k Math { ਧਨੇਸ਼ }
🌈🌸तुम ख़्वाब बन गए हो🌸🌈
शिवाभिषेक: 'आनन्द'(अभिषेक पाराशर)
सावन में एक नारी की अभिलाषा
Ram Krishan Rastogi
महताब ने भी मुंह फेर लिया है।
Taj Mohammad
*दशहरे पर मछली देखने की परंपरा*
Ravi Prakash
"मातल "
DrLakshman Jha Parimal
दुर्योधन कब मिट पाया :भाग:40
AJAY AMITABH SUMAN
कभी न होते आम
महावीर उत्तरांचली • Mahavir Uttranchali
सौदागर
पीयूष धामी
गीता के स्वर (1) कशमकश
डा. सूर्यनारायण पाण्डेय
ब्रह्म निर्णय
DR ARUN KUMAR SHASTRI
गवाह है
shabina. Naaz
कबीर साहेब की शिक्षाएं
vikash Kumar Nidan
ग़म की ऐसी रवानी....
अश्क चिरैयाकोटी
जून की दोपहर (कविता)
Kanchan Khanna
सहरा से नदी मिल गई
अरशद रसूल /Arshad Rasool
भली बातें
Dr. Sunita Singh
'भारत की प्रथम नागरिक'
Godambari Negi
ग़ज़ल-धीरे-धीरे
Sanjay Grover
आज का विकास या भविष्य की चिंता
Vishnu Prasad 'panchotiya'
जवाब दे न सके
Dr fauzia Naseem shad
गौरैया बोली मुझे बचाओ
सुरेश कुमार चतुर्वेदी
Loading...