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1 Jun 2022 · 1 min read

इन्सानियत ज़िंदा है

सुनकर कहानी उसकी
हो गई है आंखें नम सबकी
है बची अभी भी इन्सानियत
कर रही नम आंखें तसदीक इसकी

लगती है जितनी बुरी
ये दुनिया उतनी बुरी है नहीं
अच्छे लोगों से भरी है
अभी इंसानियत मरी है नहीं

बूढ़ी आंखों की उम्मीद की कहानी
हमें आज उसके पोते ने है सुनाई
कर रहा इस उम्र में भी श्रम वो
कहानी नहीं, है ज़िंदगी की सच्चाई

कर रहा मेहनत पोता भी
है आज उसकी मंज़िल करीब आई
है आंसू दोनों की आंखों में आज
क्योंकि खुशियों की घड़ियां है जो आई

है हकीकत इतनी मार्मिक
हर कोई अपने आसूं पोंछ रहा है
है जिंदा करुणा अभी भी
इस बात की तसदीक कर रहा है

रहा होगा संघर्ष कितना उसका
बिन मां बाप के बच्चे को पालने में
उम्र के इस पड़ाव में आकर भी
जिम्मेदारियों का ये बोझ उठाने में

चल रही है दुनिया ऐसे ही त्याग
और अनुराग की बदौलत आज
हरा रही है नफरत और अविश्वास
के पनपे हुए राक्षसों को वो आज।

Language: Hindi
Tag: कविता
7 Likes · 2 Comments · 346 Views
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