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आह! 14 फरवरी को आई और 23 फरवरी को चली गई

दुनिया जिस दिन को “वेलेंटाइन डे” के रूप में याद करती है। सन 1933 ई. को इसी दिन उस अप्सरा का जन्म हुआ जिसने कम उम्र में ही करोड़ों चाहने वालों को अपना मुरीद बना लिया। मेरी पसन्दीदा अभिनेत्रियों में से एक थी मधुबाला। कौन जानता था कि सन 1969 ई. की 14 फरवरी को मधु अपना आखिरी जन्मदिन मनाएगी और ठीक दस दिन बाद 23 फरवरी को गुज़र जाएगी। किसने सोचा था—ये पुण्य तिथि और जन्मदिन एक ही माह में! आह, मिर्ज़ा ग़ालिब ने अपने शेरों में ठीक ही कहा है:—

सब कहाँ? कुछ लाला-ओ-गुल में नुमायां हो गईं
ख़ाक में क्या सूरतें होंगी कि पिन्हां हो गईं
***
हस्ती के मत फ़रेब में आ जाईयो ‘असद’
आलम तमाम हल्क़ा-ए-दाम-ए-ख़याल है
***
मुमताज जहां बेगम देहलवी उर्फ फ़िल्म सिने तरिका मधुबाला जी का जन्म दिल्ली (ब्रिटिश भारत) में 14 फरवरी 1933 ई. को हुआ था। वह पिता अताउल्लाह खान और माँ आयशा बेगम की ग्यारह संतानों में से पाँचवीं संतान थीं। मधु के चार भाई–बहनों का इन्तिकाल बचपन में ही हो गया था। उनकी अन्य बहनें हैं—कनीज़ फ़ातिमा, अल्ताफ़, चंचल व ज़हीदा बेगम। अताउल्लाह खान, जो पेशावर घाटी के पश्तूनों की युसुफजई जनजाति से आए थे, इंपीरियल टबैको कंपनी में एक मामूली कर्मचारी थे। उनके वेतन से परिवार का भरण पोषण बड़ी मुश्किल से हो रहा था। अतः अच्छे भविष्य की उम्मीद में वह बम्बई आ गए और फ़िल्मी संघर्ष शुरू हुआ। मधु को कुछेक फ़िल्मों में बाल कलाकार का रोल मिलने से आस जगी। अनेक फ़िल्मों में यादगार अभिनय करते-करते वह धीरे-धीरे फ़र्श से अर्श तक पहुँच गई। लेकिन दुर्भाग्य देखिये, परिवार के अन्य सदस्यों से इतर—मधु जी एक जन्मजात हृदयगत विकार (वेंट्रिकुलर सेप्टल दोष) के साथ पैदा हुई थी, जिसका उस वक़्त कोई कामयाब इलाज विदेशों में भी नहीं था।

मधु जब छोटी सी बच्ची ही थी। तब एक किंवदंती के अनुसार, एक प्रतिष्ठित मुस्लिम फ़कीर ने भविष्यवाणी कर दी थी कि, “यह लड़की बड़ी होकर अल्पायु में ही प्रसिद्धि और भाग्य अर्जित करेंगी, लेकिन दुखी जीवन व्यतीत करते-करते कम उमरी में ही चल बसेगी।” और सच में ही कम उम्र (23 फरवरी 1969 ई.) में मात्र 36 वर्ष में ही मधुबाला का निधन हो गया।

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