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Jun 10, 2021 · 1 min read

आया जरूर हूँ

महफ़िल में आया जरूर हूँ
गम बांटने का कोई इरादा नही
नशे में भी जुबा न खुलेगी
बदनाम कर नाम मै कमाता नही
ये मेरा गम कड़बा है शराब सा
पर अपने जखीरे को मैं लुटाता नही
मेरे सामने चिपक कर खड़े है हबीब से
गैर को आज भी पहलू में मैं बिठाता नही

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