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आपकी अदालत

सुप्रीम कोर्ट का जज कहता है ,देश में दंगा हो सकता है ।
लाइन लगी है लम्बी लम्बी , जनता का धैर्य खो सकता है ॥
जज साहेब को कौन बताये, अदालतों की हालत क्या है ।
पेन्डिंग केस से भरीअदालत, इन केसों की संख्या क्या है ॥
नोट बदलने की लाइन को,जज साहेब ने गलत बताया ।
अदालतों में लगी लाइन का,क्यों कोई जज कुछ कर नहीँ पाया ॥
जज साहेब यह नोट बदलना,कुछ दिन में बंद हो जायेगा ।
लगी जो लाइन अदालतों में ,कोई ख़तम नहीँ कर पायेगा ॥
मेरा घर कितना गंदा है ,यह तो कभी मैं देख ना पाया ।
कोई दूसरा साफ करे घर ,बस उसको ही गलत बताया ॥
हर कोई अपना काम करे गर ,लाइन कहीँ नहीँ लग पायेगी ।
खुशहाली घर घर में होगी, जनता कोर्ट में क्यों जायेगी ॥

विजय बिज़नोरी

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