आग को मोम के पास लाने लगे

ज़र्फ़ अब तो सभी आज़माने लगे
आग को मोम के पास लाने लगे

पास आकर वही दूर जाने लगे
नक्श कुरबत के खुद ही मिटाने लगे

दोष उसका कहां तक न मानें हुज़ूर
जब नजर कोई खुद ही चुराने लगे

उंगलियों पर मढ़ा जा रहा है कुसूर
खुद नज़र बे इजाज़त उठाने लगे

ग़म तुम्हारा सुखन की अलामत बना
बज़्म में रंग हम भी जमाने लगे

एक पल में बसाया था दिल में कभी
भूल जाने में उसको ज़माने लगे

ठोकरे जब जमाने से मिलने लगी
वो मुझे आज अपना बताने लगे

2 Likes · 2 Comments · 109 Views
You may also like:
पर्यावरण बचा लो,कर लो बृक्षों की निगरानी अब
Pt. Brajesh Kumar Nayak
पिता
Deepali Kalra
सोने की दस अँगूठियाँ….
Piyush Goel
महापंडित ठाकुर टीकाराम 18वीं सदीमे वैद्यनाथ मंदिर के प्रधान पुरोहित
श्रीहर्ष आचार्य
संडे की व्यथा
ज्ञानीचोर ज्ञानीचोर
वेदों की जननी... नमन तुझे,
मनोज कर्ण
एक शख्स सारे शहर को वीरान कर जाता हैं
Krishan Singh
समुंदर बेच देता है
आकाश महेशपुरी
न तुमने कुछ न मैने कुछ कहा है
ananya rai parashar
मैं
Saraswati Bajpai
भगवान श्री परशुराम जयंती
सुरेश कुमार चतुर्वेदी
💐प्रेम की राह पर-29💐
शिवाभिषेक: 'आनन्द'(अभिषेक पाराशर)
बूँद-बूँद को तरसा गाँव
ईश्वर दयाल गोस्वामी
गर्म साँसें,जल रहा मन / (गर्मी का नवगीत)
ईश्वर दयाल गोस्वामी
अथर्व को जन्म दिन की शुभकामनाएं
सुरेश कुमार चतुर्वेदी
क्या गढ़ेगा (निर्माण करेगा ) पाकिस्तान
Dr.sima
पिता
Dr.Priya Soni Khare
यह तो वक्ती हस्ती है।
Taj Mohammad
आजमाइशें।
Taj Mohammad
सहरा से नदी मिल गई
अरशद रसूल /Arshad Rasool
संकोच - कहानी
अनिल कुमार गुप्ता 'अंजुम'
कविराज
Buddha Prakash
$ग़ज़ल
आर.एस. 'प्रीतम'
#पूज्य पिता जी
आर.एस. 'प्रीतम'
माँ गंगा
Anamika Singh
"बीते दिनों से कुछ खास हुआ है"
Lohit Tamta
कच्चे आम
Prabhat Ranjan
पिता, इन्टरनेट युग में
Shaily
उसके मेरे दरमियाँ खाई ना थी
Khalid Nadeem Budauni
श्रीयुत अटलबिहारी जी
Pt. Brajesh Kumar Nayak
Loading...