Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Write
Notifications
Wall of Fame

“आखिर क्यों “

“आखिर क्यों ?”
राम अपनी प्रजा का हाल लेने के लिए भेष बदलकर घूम रहे थे | तभी उन्होंने एक धोबी और धोबन को लड़ते हुए सुना | धोबी धोबन को कह रहा था, “मैं राम नहीं हूँ, जो तुम्हे एक रात घर से बाहर गुजारने के बाद भी अपने घर में रख लूँगा |” इतना सुनते ही राम अपने महल में लौट गए | अगले दिन भरे दरबार में राम ने सीता को बुलवाया और उनसे इतने सालों तक राम से अलग होकर रावण के पास समय गुजारने के जुर्म में घर से निकल जाने का हुकुम सुना दिया, और लक्ष्मण को आदेश दिया कि सीता को जंगल में छोड़ आओ | सीता ने जैसे ही राम के वचन सुने वो बिफर पड़ी, ” महाराज, मैं जंगल क्यों जाऊं | रावण के पास से आने के बाद आपने मुझे ऐसे ही नहीं अपना लिया था | पहले मेरी अग्नि परीक्षा ली थी तभी मुझे अपने साथ वापस अयोध्या लाये थे | तो अग्निपरीक्षा के बाद भी आप मुझे घर से क्यों निकाल रहे हैं ? आप भी तो मुझसे इतने साल अलग रहे और घर से बाहर भी, क्या मैंने आपकी अग्निपरीक्षा ली ? क्या मैंने किसी की बात सुनी ? नहीं न ! आप तो ये सब करके पुरुषोत्तम बन गए | क्या आपको पता नहीं है कि मैं माँ बनने वाली हूँ फिर भी आप मुझे दोबारा वनवास दे रहे हैं? मैं अग्निपरीक्षा के बाद इस घर में वापस आयी हूँ, मैं नहीं जाने वाली इस घर से बाहर और मैं धरती में समाने वाली भी नहीं | राम, लक्ष्मण और सभी दरबारी सीता का मुंह देखते रह गए | और नाटक का पर्दा गिर गया | थोड़ी देर तक तो हॉल में सन्नाटा छाया रहा, जैसी किसी की कुछ समझ में ही नहीं आया | और फिर सारा हॉल वहां उपस्थित महिलाओं की तालियों की गडगडाहट से गूँज उठा |

“सन्दीप कुमार”
०४/०८/२०१६

237 Views
You may also like:
मुंह की लार – सेहत का भंडार
Vikas Sharma'Shivaaya'
मेरे हाथो में सदा... तेरा हाथ हो..
Dr. Alpa H. Amin
घड़ी
AMRESH KUMAR VERMA
मजदूर हूॅं साहब
Deepak Kohli
“मोह मोह”…….”ॐॐ”….
Piyush Goel
पुस्तक समीक्षा -एक थी महुआ
Rashmi Sanjay
सफलता की कुंजी ।
Anamika Singh
नजरों की तलाश
Dr. Alpa H. Amin
देखो हाथी राजा आए
VINOD KUMAR CHAUHAN
An Oasis And My Savior
Manisha Manjari
" कोरोना "
Dr Meenu Poonia
"पिता"
Dr. Alpa H. Amin
पिता का साथ जीत है।
Taj Mohammad
कभी भीड़ में…
Rekha Drolia
चिंता और चिता
VINOD KUMAR CHAUHAN
कोई तो हद होगी।
Taj Mohammad
मेरे बुद्ध महान !
मनोज कर्ण
हमारी प्यारी मां
Shriyansh Gupta
पिता का सपना
Prabhudayal Raniwal
✍️✍️धूल✍️✍️
"अशांत" शेखर
Where is Humanity
Dheerendra Panchal
स्वप्न-साकार
Prabhudayal Raniwal
जैसा भी ये जीवन मेरा है।
Saraswati Bajpai
हिन्दू साम्राज्य दिवस
jaswant Lakhara
पत्नी जब चैतन्य,तभी है मृदुल वसंत।
Pt. Brajesh Kumar Nayak
पिता है मेरे रगो के अंदर।
Taj Mohammad
नाम
Ranjit Jha
बताकर अपना गम।
Taj Mohammad
श्रंगार के वियोगी कवि श्री मुन्नू लाल शर्मा और उनकी...
Ravi Prakash
पुस्तक की पीड़ा
सूर्यकांत द्विवेदी
Loading...