Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Write
Notifications
Settings

आओ ऐसे मनाये दिवाली

आओ ऐसे मनाये दिवाली

आओ सब मिलकर हम ऐसे मनाएंगे अब दिवाली
भूखे को अन्न देंगे और प्यासे को पिलायंगे पानी

सैकड़ो के जलाये पटाखे,फिर भी हाथ रहे अपने खाली
सूने घर में दिया न जला सको,तो काहे की बनी दिवाली

अपनों में बाटे मिठाई उपहार और खूब सजाई घर में रंगोली
ये खुशिया किस काम की गर न पोछा किसी आँख का पानी

अपने लिए तो हर पल जीते, कभी बन जाओ थोड़ा सा दानी
नंगे तन को कपडा देकर, कभी संवारो उनकी भी जिंदगानी

आग लगा के खुश होते हम , फैलाते प्रदुषण की बिमारी
लक्ष्मी पूजन के दिन, लक्ष्मी फूंके कैसे बने हम अज्ञानी

धनवानों संग खुशियां बांटे, निर्धन को बकते गाली
इंसानो में करे भेदभाव हम,फिर कैसे आये खुशहाली

राम नाम पे पर्व मनाते, की जिसने सबरी केवट की अगवानी
पथ भ्रष्ट हो हम भूल गए क्यों उनके जीवन दर्शन की कहानी

मन में फैला द्वेष भाव, और बने राम कृष्णा के पुजारी
क्यों जलाते दीप ख़ुशी के,जब दिलो में भड़की चिंगारी

गीता, रामायण हमे याद नही, फिर क्यों मनाते दिवाली
ख़ुशी अगर किसी को दे न सके,तो ये अभिनय है बेमानी

तन, मन धन से परिपूर्ण हो सब बोले मीठी वाणी
ऊँच नीच का भेद रहे न, करे सब भोजन एक थाली

आओ सब मिलकर ये ठाने अब बदलेंगे हम जिंदगानी
हंसा सके जब किसी रोते को,तब होगी सच्ची दिवाली

आओ सब मिलकर हम ऐसे मनाएंगे अब दिवाली
भूखे को अन्न देंगे और प्यासे को पिलायंगे पानी

**** डी. के. निवातियाँ******

311 Views
You may also like:
विन मानवीय मूल्यों के जीवन का क्या अर्थ है
सुरेश कुमार चतुर्वेदी
"निर्झर"
Ajit Kumar "Karn"
यादें
kausikigupta315
ज़िंदगी में न ज़िंदगी देखी
Dr fauzia Naseem shad
माखन चोर
सुरेन्द्र शर्मा 'शिव'
पितु संग बचपन
मनोज कर्ण
छलकता है जिसका दर्द
Dr fauzia Naseem shad
मिसाले हुस्न का
Dr fauzia Naseem shad
राम घोष गूंजें नभ में
शेख़ जाफ़र खान
देश के नौजवानों
Anamika Singh
✍️कलम ही काफी है ✍️
Vaishnavi Gupta
दिल का यह
Dr fauzia Naseem shad
रावण - विभीषण संवाद (मेरी कल्पना)
Anamika Singh
मेरी तकदीर मेँ
Dr fauzia Naseem shad
गरम हुई तासीर दही की / (गर्मी का नवगीत)
ईश्वर दयाल गोस्वामी
झरने और कवि का वार्तालाप
Ram Krishan Rastogi
पिता
Saraswati Bajpai
पिता
नवीन जोशी 'नवल'
भगवान जगन्नाथ की आरती (०१
सुरेश कुमार चतुर्वेदी
ठनक रहे माथे गर्मीले / (गर्मी का नवगीत)
ईश्वर दयाल गोस्वामी
आदर्श पिता
Sahil
गंगा दशहरा
श्री रमण 'श्रीपद्'
हवा का हुक़्म / (नवगीत)
ईश्वर दयाल गोस्वामी
ऐ ज़िन्दगी तुझे
Dr fauzia Naseem shad
साधु न भूखा जाय
श्री रमण 'श्रीपद्'
हर घर तिरंगा
सुरेन्द्र शर्मा 'शिव'
✍️सच बता कर तो देखो ✍️
Vaishnavi Gupta
पिता:सम्पूर्ण ब्रह्मांड
साहित्य लेखन- एहसास और जज़्बात
✍️दो पल का सुकून ✍️
Vaishnavi Gupta
The Buddha And His Path
Buddha Prakash
Loading...