Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Write
Notifications
Settings
Jul 27, 2016 · 1 min read

आँधियाँ

जब चराग़ों ने डरना छोड़ दिया.,
आँधियों का ग़ुरूर तोड़ दिया.!
जिसको तिनका समझ रहे थे लोग.,
रुख़ हवाओं का उसने मोड़ दिया..!!

((( ख़ुमार देहल्वी )))

1 Like · 1 Comment · 319 Views
You may also like:
ख़्वाब सारे तो
Dr fauzia Naseem shad
प्यार की तड़प
सुरेन्द्र शर्मा 'शिव'
✍️बचपन का ज़माना ✍️
Vaishnavi Gupta
हम सब एक है।
Anamika Singh
मर गये ज़िंदगी को
Dr fauzia Naseem shad
बुध्द गीत
Buddha Prakash
तुमसे कोई शिकायत नही
Ram Krishan Rastogi
जीवन एक कारखाना है /
ईश्वर दयाल गोस्वामी
समय ।
Kanchan sarda Malu
✍️महानता✍️
'अशांत' शेखर
गर्मी का कहर
Ram Krishan Rastogi
"पिता का जीवन"
पंकज कुमार कर्ण
The Buddha And His Path
Buddha Prakash
पिता
Buddha Prakash
पिता की याद
Meenakshi Nagar
पाँव में छाले पड़े हैं....
डॉ.सीमा अग्रवाल
ओ मेरे साथी ! देखो
Anamika Singh
तुम ना आए....
डॉ.सीमा अग्रवाल
चराग़ों को जलाने से
Shivkumar Bilagrami
माँ की याद
Meenakshi Nagar
ख़्वाब आंखों के
Dr fauzia Naseem shad
अब और नहीं सोचो
सुरेन्द्र शर्मा 'शिव'
कुछ दिन की है बात ,सभी जन घर में रह...
Pt. Brajesh Kumar Nayak
छलकता है जिसका दर्द
Dr fauzia Naseem shad
"फिर से चिपको"
पंकज कुमार कर्ण
लाचार बूढ़ा बाप
jaswant Lakhara
✍️पढ़ रही हूं ✍️
Vaishnavi Gupta
बस एक निवाला अपने हिस्से का खिला कर तो देखो।
Gouri tiwari
✍️पढ़ना ही पड़ेगा ✍️
Vaishnavi Gupta
आस
लक्ष्मी सिंह
Loading...