Oct 7, 2016 · 1 min read

आँखों में आंसू और दिल में वो दर्द न थे

आँखों में आंसू और दिल में वो दर्द न थे
टूट गये रिश्ते फिर भी तुम आजिज़ न थे

वक़्त ने कसोटी पे तराशा हे एक सा हमे
पर मेरे इब्तिला से तुम तो ‘वाकिफ’ न थे

तुम तो बड़ी ‘खामोसी’ में निकल गये पर
मेरे ‘गिरियां’ किसी ने देखे और सुने न थे

बड़ी नुमाइस हो रही थी हमारे ‘प्यार’ की
सब तमाशाई ही खड़े थे गम़गुस्सार न थे

आवाजे गूंजती रही दिवालो के पीछे की
हमतो बे इख्त़ियारी थे शर्मसार तुम न थे
@अंकुर…..

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