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Sep 3, 2016 · 1 min read

आँखे

आँखे

कैसे कहूँ
आँखों की बात
देखूँ
तो लगे
झील की गहराई
स्वप्न सी सच्चाई

एक मधुशाला सी
प्रेम की पाठशाला सी
नृत्य की रंगशाला सी
आँखों मे
न मिटने वाली प्यास
शायद इन आँखों को
खास की तलाश है

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