“अलसाती सुबह”

देखो मुख मंजीर में ढाकें,
मतवाली, मदिरगामिनी,
धूप की चादर को तानें ,
है खड़ी अलसाती सुबह|

आंखों में कुछ रंग निशा के,
स्वप्न लिये उमंग जीवन के,
मधु मकरंद भर साँसों में ,
खो गई मनमोहिनी सुबह|

है दुबकती जा रही वह अकिंचन,
निष्प्राण , निष्पाप सी लाजवन्ती,
नव सुरभि के साथ मलय में ,
भोर के गीत गुनगुनाती सुबह||
…निधि…

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