Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Write
Notifications
Wall of Fame
Oct 10, 2016 · 1 min read

अमीरों की बनकर रही रौशनी है

अमीरों की बनकर रही रौशनी है,
गरीबों के हिस्से मे बस तीरगी है।

मै बातें करूं चांद तारों की कैसे,
मुझे रौशनी जुगनुओं से मिली है।

मिरी मुश्किलों से रही दूरियां जो,
दुआ साथ मां की हमेशा रही है।

भटकती है दिन भर यहां से वहां जो,
मुहब्बत नही है ये आवारगी है।

वो भटका नही राह से फिर कभी भी,
जिसको खुदा की मिली रहबरी है।

फ़लक से भी ऊपर गये हैं ‘सिवा’ वो,
निगाहों मे जिनके बुलन्दी रही है।

सिवा संदीप गढ़वाल

2 Comments · 145 Views
You may also like:
पिता की सीख
Anamika Singh
भारत को क्या हो चला है
Mr Ismail Khan
अथर्व को जन्म दिन की शुभकामनाएं
सुरेश कुमार चतुर्वेदी
फ़ालतू बात यही है
gurudeenverma198
जगाओ हिम्मत और विश्वास तुम
gurudeenverma198
अज़ल की हर एक सांस जैसे गंगा का पानी है./लवकुश...
लवकुश यादव "अज़ल"
बदरिया
Dhirendra Panchal
हमको आजमानें की।
Taj Mohammad
शेर
dks.lhp
✍️I am a Laborer✍️
"अशांत" शेखर
देखो हाथी राजा आए
VINOD KUMAR CHAUHAN
पानी
Vikas Sharma'Shivaaya'
दो बिल्लियों की लड़ाई (हास्य कविता)
महावीर उत्तरांचली • Mahavir Uttranchali
बाल श्रम विरोधी
Utsav Kumar Aarya
आंधी में दीया
Shekhar Chandra Mitra
मुक्तक: युद्ध को विराम दो.!
Prabhudayal Raniwal
कोई हमारा ना हुआ।
Taj Mohammad
शिव शम्भु
Anamika Singh
पिता
Satpallm1978 Chauhan
🙏विजयादशमी🙏
पंकज कुमार "कर्ण"
पूंजीवाद में ही...
Umesh उमेश शुक्ल Shukla
ग़ज़ल -
Mahendra Narayan
शैशव की लयबद्ध तरंगे
Rashmi Sanjay
भाईजान की बात
AJAY PRASAD
चला कर तीर नज़रों से
Ram Krishan Rastogi
✍️बोन्साई✍️
"अशांत" शेखर
समय
AMRESH KUMAR VERMA
Only for L
श्याम सिंह बिष्ट
यही है मेरा ख्वाब मेरी मंजिल
gurudeenverma198
पुस्तक
AMRESH KUMAR VERMA
Loading...