Oct 18, 2021 · 1 min read

अभ्यास

सब पता है
इस आसमान के नीचे
धरती के ऊपर खिले
फूल को कि
इसे मुर्झाना है
यह जहां छोड़कर
एक न एक दिन तो
कहीं जाना है
फिर भी यह
मोहपाश के बंधनों से
बंधा है
वहीं खड़ा खड़ा
कितनी दूर निकल जाता है
जैसे अभ्यास करता हो कि
ऐसी ही फिर
एक दिन तो सबसे दूर
चले जाना है
फिर कभी लौटकर न
आने के लिए।

मीनल
सुपुत्री श्री प्रमोद कुमार
इंडियन डाईकास्टिंग इंडस्ट्रीज
सासनी गेट, आगरा रोड
अलीगढ़ (उ.प्र.) – 202001

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