Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
8 Jun 2022 · 1 min read

अब भी श्रम करती है वृद्धा / (नवगीत)

नवदशकों को
धता बताकर ।
मन पर यौवन
लेप चढ़ाकर ।
अब भी श्रम
करती है वृद्धा ।

ममता भरी
नदी यह माँ की
और सास है
सुगर सयानी ।
पोती-पोते,
बेटी-बेटे औ’
बहुओं की
है महारानी ।

हुक्म चलाती,
सेवा करती ।
हरेक ज़ख्म में,
मरहम भरती ।
चौका-बासन
इसकी श्रद्धा ।
अब भी श्रम
करती है वृद्धा ।

नब्बे तपन
पार करके भी
खिली वसंत की
ये फुलवारी ।
झाड़ू-पौंछा,
बिड़ी भाँजना
और सींचना
आँगन क्यारी ।

बैठे-बैठे
कभी न खाया ।
जो भी खाया,
कर्ज़ चुकाया ।
फ़र्ज़ निभाने
में भी सिद्धा ।
अब भी श्रम
करती है वृद्धा ।

तनहाई,बैरिन
है इसकी,
भीड़ इसे अच्छी
लगती है ।
होंठों पर
मुस्कान लिए
है, आँख विरह
पीड़ा दिखती है ।

श्वास-श्वास में
पति वियोग है ।
हाथ-पाँव में
कर्म योग है ।
संकल्पों की
सिद्धा-रिद्धा ।
अब भी श्रम
करती है वृद्धा ।

नवदशकों को
धता बताकर ।
मन पर यौवन
लेप चढ़ाकर ।
अब भी श्रम
करती है वृद्धा ।
— ईश्वर दयाल गोस्वामी ।

Language: Hindi
Tag: गीत
13 Likes · 26 Comments · 215 Views
You may also like:
✍️हर लड़की के दिल में ✍️
Vaishnavi Gupta (Vaishu)
'मृत्यु'
Godambari Negi
"गर्वित नारी"
Dr Meenu Poonia
🌺🌺प्रेम की राह पर-41🌺🌺
शिवाभिषेक: 'आनन्द'(अभिषेक पाराशर)
✍️एक नन्हे बच्चे इंदर मेघवाल की मौत पर...!
'अशांत' शेखर
हनुमंता
Dhirendra Panchal
=*तुम अन्न-दाता हो*=
Prabhudayal Raniwal
बरसात
प्रकाश राम
भाये ना यह जिंदगी, चाँद देखे वगैर l
अरविन्द व्यास
जिज्ञासा
Rj Anand Prajapati
भोजन
Vikas Sharma'Shivaaya'
धैर्य कि दृष्टि धनपत राय की दृष्टि
नंदलाल मणि त्रिपाठी पीताम्बर
छद्म राष्ट्रवाद की पहचान
Mahender Singh Hans
दो शे'र
डॉक्टर वासिफ़ काज़ी
अपनी आँखों से ........................................
लक्ष्मण 'बिजनौरी'
जब मर्यादा टूटता है।
Anamika Singh
सच्ची दीवाली
rkchaudhary2012
*"चित्रगुप्त की परेशानी"*
Shashi kala vyas
*पॉंव जमाना पड़ता है (मुक्तक)*
Ravi Prakash
मन पीर कैसे सहूँ
Dr. Sunita Singh
दिल पूछता है हर तरफ ये खामोशी क्यों है
VINOD KUMAR CHAUHAN
'स्मृतियों की ओट से'
Rashmi Sanjay
घर घर तिरंगा हो।
Rajesh Kumar Arjun
बरसात आई झूम के...
Buddha Prakash
औरत एक अहिल्या
Kaur Surinder
भांगड़ा पा ले
महावीर उत्तरांचली • Mahavir Uttranchali
एक दिन यह समझ आना है।
Taj Mohammad
तुम बूंद बंदू बरसना
Saraswati Bajpai
कृष्णा... अरे ओ कृष्णा...
Seema 'Tu hai na'
बात होती है सब नसीबों की।
सत्य कुमार प्रेमी
Loading...