अपने ही करम से //गीतिका//

अपने ही करम से इंसान है तंग
यहाँ जीवन खेल है,जीवन है जंग

असलियत छिपा कर चलते है लोग
किसे पता किसका ईमान हैं बदरंग

चलते नहीं क्यों,कोई सीधे राह में
वक्त के इंतज़ार में जीवन है दरंग

ऐसे नीरस जीवन का क्या फायदा
न खुद का साया न मन है संग

आसमां में बेखौफ़ उड़ता क्यों नहीं
छू नयी ऊचाँई को जीवन है पतंग

दुष्यंत कुमार पटेल “चित्रांश”

153 Views
You may also like:
🍀🌺प्रेम की राह पर-43🌺🍀
शिवाभिषेक: 'आनन्द'(अभिषेक पाराशर)
आंखों में तुम मेरी सांसों में तुम हो
VINOD KUMAR CHAUHAN
अब ज़िन्दगी ना हंसती है।
Taj Mohammad
और कितना धैर्य धरू
Anamika Singh
मन की मुराद
मनोज कर्ण
सच्चा प्यार
Anamika Singh
नित हारती सरलता है।
Saraswati Bajpai
खूबसूरत एहसास.......
Dr. Alpa H.
पिता
Kanchan Khanna
"निरक्षर-भारती"
Prabhudayal Raniwal
आज तिलिस्म टूट गया....
Saraswati Bajpai
सुन ज़िन्दगी!
Shailendra Aseem
धूप कड़ी कर दी
सिद्धार्थ गोरखपुरी
पिता
Rajiv Vishal
मैं आज की बेटी हूं।
Taj Mohammad
उबारो हे शंकर !
Shailendra Aseem
🙏विजयादशमी🙏
पंकज कुमार "कर्ण"
जिम्मेदारी और पिता
Dr. Kishan Karigar
पिता एक सूरज
डॉ. शिव लहरी
# जज्बे सलाम ...
Chinta netam मन
एक पत्र बच्चों के लिए
Manu Vashistha
तुम मेरी हो...
Sapna K S
पहचान लेना तुम।
Taj Mohammad
जी हाँ, मैं
gurudeenverma198
Waqt
ananya rai parashar
*हास्य-रस के पर्याय हुल्लड़ मुरादाबादी के काव्य में व्यंग्यात्मक चेतना*
Ravi Prakash
अभी तुम करलो मनमानियां।
Taj Mohammad
माँ तेरी जैसी कोई नही।
Anamika Singh
हाइकु _पिता
Manu Vashistha
माखन चोर
N.ksahu0007@writer
Loading...