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अपने मन की मान

अपने मन की मान,
मत रख कच्चे कान,
सत्य असत्य पहचान,
अपने पराये को जान,

छोड़ चलना भेड़ चाल,
अपनी राह खुद निकाल,
अपने कदम तू संभाल,
जला ले ज्ञान की मशाल,

स्वार्थ का यह दौर है,
नहीं इसका छोर है,
चारो तरफ यहीं शोर है,
उम्मीदो वाली नहीं भोर है,
—जेपी लववंशी

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