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Sep 16, 2017 · 1 min read

*अपना ही आशीयाना*

विधा— गजल
अपना ही आशीयाना
यू ना जलाइये .
क्यू बदला है मिजाज कुछ तो बताइये ॥
कल तक तो कुछ न था
क्या आज हो गया
दिल मे लगी ये आग
इसको बुझाइये ॥
मै जीता हू मगर यू
बस तूझे देखकर
तेरी याद को मै क्या करू
इसको बताइये ॥
दिल लग गया कही और क्या
जो मुणना मुनासीब नही
दिल रो रहा है!आप बिन
इसको न रूलाइये ॥
अपना ही आशीयाना……..
रचनाकार…विजय कुमार साहनी

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