Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Write
Notifications
Wall of Fame
Oct 25, 2016 · 1 min read

अनेक एक हो जाते हैं ! —–जितेन्द्र कमलआनंद ( ११३)

प्रिय आय्मन !
जब स्वयं का चोला ही रंग जाता है
उसके रंग में , तब —
अनिवार्यता नहीं रहती गैरिक वस्त्रों की
अथवा बाघम्बर की / माला जाप के मंत्रों की ,
वाह्य अस्त्र ,– शस्त्रों की , जब —
यह परब्रह्म मूर्ति , यह आनंदमूर्ति
अथवा प्रेममूर्ति
आनंद से / आनंद में / आनंद द्वारा
आनन्द के लिए / मन के दर से
मन के घर से
मन – मंदिर में प्रविष्ट हो जाती है
तब आवश्यकता नहीं रहती
मूर्ति अर्चना की …….. ( शेष फिर …)
— जितेन्द्रकमल आनंद

1 Comment · 199 Views
You may also like:
*देखने लायक नैनीताल (गीत)*
Ravi Prakash
पाकीज़ा इश्क़
VINOD KUMAR CHAUHAN
【30】*!* गैया मैया कृष्ण कन्हैया *!*
Arise DGRJ (Khaimsingh Saini)
घनाक्षरी छंद
शेख़ जाफ़र खान
अगर तुम खुश हो।
Taj Mohammad
पिता
पूनम झा 'प्रथमा'
बिछड़न [भाग ३]
Anamika Singh
ज़िन्दगी की धूप...
Dr. Alpa H. Amin
दिले यार ना मिलते हैं।
Taj Mohammad
चिंता और चिता
VINOD KUMAR CHAUHAN
दोस्ती अपनी जगह है आशिकी अपनी जगह
Dr.SAGHEER AHMAD SIDDIQUI
*श्री राजेंद्र कुमार शर्मा का निधन : एक युग का...
Ravi Prakash
माँ तेरी जैसी कोई नही।
Anamika Singh
प्रेयसी
Dr. Sunita Singh
✍️तर्क✍️
"अशांत" शेखर
मज़दूर की महत्ता
Dr. Alpa H. Amin
गंगा माँ
Anamika Singh
पानी यौवन मूल
Jatashankar Prajapati
तुम चाहो तो सारा जहाँ मांग लो.....
डॉ. अनिल 'अज्ञात'
रिश्तों की डोर
मनोज कर्ण
चढ़ता पारा
जगदीश शर्मा सहज
परिकल्पना
संदीप सागर (चिराग)
" बहू और बेटी "
Dr Meenu Poonia
छोटी-छोटी चींटियांँ
Buddha Prakash
✍️जमाना नहीं रहा...✍️
"अशांत" शेखर
बचपन की यादें
AMRESH KUMAR VERMA
एक बात... पापा, करप्शन.. लेना
Nitu Sah
वक़्त
Mahendra Rai
नवाब तो छा गया ...
ओनिका सेतिया 'अनु '
बचपन
Anamika Singh
Loading...