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अनहोनी

अनहोनी

अचानक सड़क पर एक चीख सुनाई पड़ती है । छ्ज्जे परखड़े दो छात्रआपस मे गुफ्तगू कर रहे थे । धुंधलका गहराने लगा था । सड़के सूनी हो गयी थी । फिर ये चीख कैसी घ्ध्यान से देखने पर दृस्टिगतहुआ कि दो गुंडे एक राहगीर पर चाकू से वार कर रहे थे । उसको लूट रहे थे । छज्जे पर खड़े ये दोनों छात्र ही घटना के चश्मदीद गवाह थे । खून से लथपथ राहगीर मृत्यु के मुंह मे समा गया । दोनों छात्रों को इन गुंडो ने देख लिया था अत रूअचानक हुई इस अनहोनी घटना से दोनों भयग्रस्त हो गए थे। दिमाग मे असुरक्षा ए भविष्य को लेकर आशंकाओ के झंझावात चलने लगे थे । लगता था शांतचित मे उठा ये तूफान कुछ विनाश करके ही जाएगा । हे ईश्वर कभी कुसंगति मत देना !चाहे कुसंगी कितना ही मीठा बोले ।प्यार से आचरण करे उसका मन्तव्य हानी पहुचाना ही होता है
दोनों छात्रों के मन मे उठा तूफान उनकी रातों कि नींद गायब करने वाला था । चिंता दृ भय से ग्रस्त दोनों युवा थे । सोनू ए मोनु मात्र 18 वर्ष के थे । उनका सुनहरा भविष्य उनके सामने था ए अपने सुनहरे सपनों को वे इस तरह उजड़ता नहीं देख सकते थे अत रूदोनों ने निश्चय किया कि वे शहर छोड़ कर चले जाएंगे । वे प्रतिभाशाली थे ए मेहनती थे ए वे अपनी क्लास के होनहार छात्र थे । उन्होने तूफान कि दिशा मोड़ने कि ठान ली । उन्होने ना केवल उक्त सत्र मे विश्राम किया बल्कि दूसरे विषय के इम्तहान कि तैयारी शुरू कर दी । दोनों मेधावी छात्र अपने प्रथम प्रयास मे ही सफल रहे । उन्होने लोक सेवा परीक्षा के प्रथम चरण कि परीक्षा पास कर ली । जिस शहर को उन्होने चुना था वह शहर अत्यंत सम्पन्न एवम विकसित था । रात्री मे भी इस शहर मे दुकाने खुली रहती थी । छात्रो को रात्री मे भ्रमण करना ए देर रात पेट पूजा करना अच्छा लगता था । उनका जीवन जैसे पटरी पर लौट रहा था जीवन कि नौका बड़ी तेजी से अपने गंतव्य कि ओर अग्रसर थी । परंतु विधाता को कुछ और ही मंजूर था । सोनूए मोनु कि नौका किनारे लगे ए ईश्वर को पसंद नहीं आया था ।
रात्री के मध्य प्रहर मे जब रात अपनी चरम पर होती है जब जन समुदाय अपनी चिरनिद्रा मे लीन था । दोनों सोनू और मोनु अपनी साधना मे व्यस्त थे । श्री मद भागवत गीता मे लिखा है कि भोगीजन सारी रात सोते हैं और योगी जन सारी रात साधना मे व्यस्त रहते हैं । रात्री के शीतल प्रकाश मे शांत चित हो वे अध्ययन मे लगे रहते हैं । अचानक सोनू मध्य रात्री के प्रहर मे मोनु से बाइक से रात्री मे खुले बाजार को चलने की जिद करता है और भेल पूरी खाने और ताजगी के लिए सैर सपाटे पर चलने को कहता है। वे दोनों उक्त मध्य रात्री मे चावडी बाजार पहुँचते हैं ए और भेल एवम कॉफी पी कर वे वापस हॉस्टल का रुख करते हैं । हॉस्टल बाजार से कुछ ही दूरी पर था । मोनु ड्राइव कर रहा था और सोनू पीछे बैठा था । अचानक सोनू के मोबाइल की घंटी बजने लगी ए सोनू ने बाइक पर खड़े होकर मोबाइल निकालने की कोशिश की ।तभी मोनु ने एक शराबी को लड़खड़ाते कदमो से सड़क के बीचोंबीच इधर दृउधर चलते देखा । बाइक पर जब तक मोनु नियंत्रण करता बाइक शराबी से भिड़ चुकी थी । शराबी को बचाते दृबचाते मोनु दुर्घटना ग्रस्त हो चुका था । शराबी बड़बड़ाते हुए पुन रूउठ खड़ा हुआ औए बढ़ गया । मोनु के सिर मे चोट लगी थी ए उसका सिर फट गया था । सोनू किसी तरह बाइक पर बैठा कर मोनु को मेडिकल कॉलेज ले गया । परंतु सी एम ओ ने उसे जबाब दे दिया । डाक्टर ने समझाया कि मोनू कुछ ही क्षणो का मेहमान है । सोनू पर तो दुखों का पहाड़ टूट पड़ा था । उसका वहाँ अपना कोई नहीं था जिस मृत्यु के भय से भाग कर उन्होने यहाँ शरण ली थी ए नए सपने देखे थे । वही सहर उनके विछोह का कारण बना गया था । नियति को यही मंजूर था । सोनू अपने मित्र के वियोग मे फूट फूट कर रो रहा था ए सारे प्रयासों के बावजूद मोनू की नौका बीच मझधार मे डूब चुकी थी । विधाता ने शायद सभी के भाग्य मे लिख दिया है कि कौन कहाँ और कैसे अपनी अंतिम यात्रा पूरी करेगा ।

कहानी …….डा प्रवीण कुमार श्रीवास्तव सीतापुर

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