Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Write
Notifications
Wall of Fame
#5 Trending Author
Apr 11, 2022 · 1 min read

अनजान बन गया है।

हमारा उनका रिश्ता कैसा हो गया है।
गलती हमारी ही है जो वह यूं अनजान बन गया है।।1।।

हमें ना पता था इतना दूर चले जाओगे।
अब देखो तो ये मुस्तकबिल कितना बिगड़ गया है।।2।।

हर शहर हर दर पर हम कबसे जा रहे है।
तुम्हारी तलाश ने हमको बिना घर का कर दिया है।।3।।

तुम छोड़कर क्या गए यह शहर हमारा।
हमको तेरे इश्क ने बशर दूजे शहर का कर दिया है।।4।।

वह फरिश्ता ही था जो इंसानो जैसा था।
आकर हमारी तकदीर बदल के जो यूं चल दिया है।।5।।

कयामत ना आएगी इस दुनियां में अभी।
गर मुसलमा है जहां में रसूले खुदा ने कह दिया है।।6।।

ताज मोहम्मद
लखनऊ

1 Like · 2 Comments · 83 Views
You may also like:
हो दर्दे दिल तो हाले दिल सुनाया भी नहीं जाता।
सत्य कुमार प्रेमी
यादें आती हैं
Krishan Singh
वृक्ष की अभिलाषा
डॉ. शिव लहरी
"महेनत की रोटी"
Dr. Alpa H. Amin
An abeyance
Aditya Prakash
माँ तुम सबसे खूबसूरत हो
Anamika Singh
उफ्फ! ये गर्मी मार ही डालेगी
Deepak Kohli
गरीब की बारिश
AMRESH KUMAR VERMA
मेघो से प्रार्थना
Ram Krishan Rastogi
चार काँधे हों मयस्सर......
अश्क चिरैयाकोटी
“माँ भारती” के सच्चे सपूत
DESH RAJ
वसंत का संदेश
Anamika Singh
तन्हा हूं, मुझे तन्हा रहने दो
Ram Krishan Rastogi
दिल का करार।
Taj Mohammad
बुआ आई
राजेश 'ललित'
जो देखें उसमें
Dr.sima
नुमाइश बना दी तुने I
Dr.sima
अशोक विश्नोई एक विलक्षण साधक (पुस्तक समीक्षा)
Ravi Prakash
हिय बसाले सिया राम
शेख़ जाफ़र खान
ग्रीष्म ऋतु भाग ३
Vishnu Prasad 'panchotiya'
छद्म राष्ट्रवाद की पहचान
Mahender Singh Hans
काव्य संग्रह
AJAY PRASAD
पितृ स्वरूपा,हे विधाता..!
मनोज कर्ण
पैसा
Arjun Chauhan
✍️पैरो तले ज़मी✍️
"अशांत" शेखर
क्या क्या पढ़ा है आपने ?
"अशांत" शेखर
आनंद अपरम्पार मिला
श्री रमण
बात चले
सिद्धार्थ गोरखपुरी
पुस्तक समीक्षा -एक थी महुआ
Rashmi Sanjay
जो... तुम मुझ संग प्रीत करों...
Dr. Alpa H. Amin
Loading...