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8 May 2022 · 1 min read

अँधेरा बन के बैठा है

किसी षड्यंत्र का मजबूत घेरा बन के बैठा है,
उजाला नाम है उसका अँधेरा बन के बैठा है।
लुटे हो पर नहीं जाना वहाँ तुम न्याय की खातिर,
वो पहरेदार है लेकिन लुटेरा बन के बैठा है।

– आकाश महेशपुरी
दिनांक- 07/05/2022

Language: Hindi
Tag: मुक्तक
5 Likes · 9 Comments · 455 Views
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