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pratik jangid

रचनाकार- pratik jangid

विधा- कविता

अरसा हो गया मुझे बदले , अब तो मुझे बदलने दो !
कभी पन्ना बदला करता था , अब तो मुझे पूरा बदलने दो !
फिर आऊंगा इसी तरह , कुछ वक्त तो मुझे भी मिलने दो !
दिन भी वही होंगे और राते भी वही उमंग और खुशिया भी !
उन्ही खुशियों के लिए मुझे बस एक करवट बदल लेने दो !
अरसा हो गया मुझे बदले , अब मुझे भी बदलने दो !

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pratik jangid
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