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मेरी प्यारी बहना

आशीष राय शीफ के मोती गले की माला सी है,मेरी प्यारी बहना। पापा की परी माँ का गहना है,मेरी प्यारी बहना। घर का हर कोना खुशबू से महकती है,मेरी प्यारी [...]

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जब से दुकान खोली है तीरो कमान की

Salib Chandiyanvi
अल्लाह कर रहा है हिफ़ाजत मकान की बिजली यहाँ गिरे तो गिरे आसमान [...]

कोई बतलाए आख़िर क्या करूं मैं

Nasir Rao
कोई बतलाए आख़िर क्या करूं मैं छुपाऊँ क्या मैं ज़ाहिर क्या करूं [...]

तेरे ख़्वाब

Rakesh kumar
जल्दी सो जाता हूँ अक्सर, तेरे ख़्वाबों की आस में! फिर सारी रात गुज़र [...]

कब आओगे

त्रिलोक सिंह ठकुरेला
अनगिनत दुःशासन चीरहरण करते वसुधा का, आँचल रोज सिमटता [...]

देश हमारा

त्रिलोक सिंह ठकुरेला
सुखद, मनोरम, सबका प्यारा। हरा, भरा यह देश हमारा॥ नई सुबह ले सूरज [...]

सुदर्शन चक्र से धरती पे दुष्टों को मिटाना है

Dr Archana Gupta
सुदर्शन चक्र से धरती पे दुष्टों को मिटाना है तुम्हें अवतार लेकर [...]

जन गण की………

हेमन्त कुमार 'कीर्ण'
जन गण की बरबादी छोड़ो। तन से कुर्ता खादी छोड़ो।। सत्ता है जागीर [...]

अपनी क़सम न दो मुझे लाचार मैं भी हूँ

Nasir Rao
अपनी क़सम न दो मुझे लाचार मैं भी हूँ मजबूरियों के हाथ गिरफ्तार मैं [...]

“कभी शाम को सिसकते सुना है “

Dr.Nidhi Srivastava
कभी शाम को सिसकते सुना है , उदासी में बैठी विरहनी की तरह, जब काजल [...]

इंसानियत की लाश

डॉ सुलक्षणा अहलावत
कँधे पर उसके पत्नी की नहीं इंसानियत की लाश थी, एम्बुलेंस नहीं मिली, [...]

लापता

MANINDER singh
अभी कुछ दिन पहले हुआ था उद्घाटन, तारीफ कर रहे थे नेता अपनी दनादन, आज [...]

2.मानवता

Versha Varshney
क्या जमाना आ गया खो गयी है मानवता , देख रहे जलते किसी को बचाने की [...]

ज़िंदगी

avadhoot rathore
ज़िंदगी के इतने सवाल क्यों हैं ? ज़िंदगी में इतने बवाल क्यों हैं ? [...]

संज्ञा

Shubha Mehta
जी हाँ, संज्ञा हूँ मैं। व्यक्ति या वस्तु? कभी-कभी ये बात सोच में [...]

ये तेरा क़र्ज़ है तो क़र्ज़ उतर जायेगा

Salib Chandiyanvi
आसमा छूने जो निकलेगा तो मर जाएगा तू परिन्दा है हवाओं में बिखर [...]

रगं तआस्सुब के जो देगी राजधानी हर तरफ़

Salib Chandiyanvi
खूब है मशहूर ये झूठी कहानी हर तरफ़ चाँद पर देखी गई है एक नानी हर [...]

झरोखा

डी. के. निवातिया
झरोखा जब कभी देखता हूँ यादो के झरोखो से बहुत कुछ बिखरा हुआ नजर आता [...]

रावण

डी. के. निवातिया
रावण हर वर्ष जलाते है हम सैकड़ो रावण के पुतले क्या जाने कब असली [...]

आओ ऐसे मनाये दिवाली

डी. के. निवातिया
आओ ऐसे मनाये दिवाली आओ सब मिलकर हम ऐसे मनाएंगे अब दिवाली भूखे को [...]

मनोविनोद

डी. के. निवातिया
मनोविनोद क्या कहे जमाने के हाल यंहा पर खुदा की खुदाई हमने अजीब [...]

निरर्थक

डी. के. निवातिया
हूँ अपनों का चहेता मै निरर्थक सामान की तरह फिर भी आ जाता हु सामने [...]

जब जब भी हमे तेरा ख्याल आया

डी. के. निवातिया
जब जब भी हमे तेरा ख्याल आया जब जब भी हमे तेरा ख्याल आया रह रह के दिल [...]

“संविधान” ही भारत का महाग्रंथ बन जाएगा… !!

डी. के. निवातिया
“संविधान” ही भारत का महाग्रंथ बन जाएगा… !! सारे देश में होगी [...]

दिखावे का दौर

डी. के. निवातिया
दिखावे का दौर दिखावे का दौर प्रदर्शन अभिनय दिखावे का आया कैसा [...]

!!!—क्यों छोड़ा था तूने अपना ये गाँव जरा लिखना–!!!

डी. के. निवातिया
!!!—क्यों छोड़ा था तूने अपना ये गाँव जरा लिखना–!!! शहर जाकर ऐ मेरे [...]

मिटटी………

डी. के. निवातिया
जीवन का सार है, उत्पत्ति का आधार है जल हो या वायु संपूर्ण जगत की [...]

आनदं की खोज मैं

डी. के. निवातिया
क्यों जूझ रहा इंसान आनदं की खोज मैं, गवाँ बैठा है होश दुनिया की [...]

याद

डी. के. निवातिया
याद मिटाओगे कहाँ तक मेरी यादें, हम हर मोड़ पर लफ्जों की वीरानी छोड़ [...]

मुझे लाचार रहने दो

डी. के. निवातिया
मै सिस्टम लाचार मुझे लाचार रहने दो दुनिया कहे बीमार मुझे बीमार [...]

जीवन का अहसास

हेमन्त कुमार 'कीर्ण'
भूख लिखूँ या प्यास लिखूँ। जीवन का अहसास लिखूँ।। अब अपने ही छलते [...]