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देश पूँछता कहाँ विभीषण

Laxminarayan Gupta छाती सह्ती नित पद प्रहार होती सहिष्णुता तार तार हम बन कर गांधी बार बार लुटने देते हैं नंदन वन, देश पूछता कहाँ विभीषण ? रावण की सत्ता बनी [...]

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रहे मदहोश हम मद में ,न जब तक हार को देखा

Dr Archana Gupta
रहे मदहोश हम मद में ,न जब तक हार को देखा हमें तब होश आया जब समय की मार [...]

आवाज

अतुल कुमार राय
​उसकी रुसवाई ही थी जो कलम ने सचबयानी को मजबूर कर दिया। मस्तमलंग [...]

आइना

अतुल कुमार राय
​सब चेहरे बेचेहरे हो गये जब, आईना समाज से रूठा और टूट गया। पाशविक [...]

चेतावनी

अतुल कुमार राय
कब तलक जियोगे गुमनाम रहकर जिन्दगी जाया हो जाएगी। रात भी मुँह मोड़ [...]

गरीब की खुशी

अतुल कुमार राय
दुखों के ढेर से खुशी माँ के आँचल में छानता हूँ। मयस्सर इक औरत [...]

शायरी

अतुल कुमार राय
१. आज चाँदनी सहमी सहमी सा क्यूँ है, शमा फिजा की ठहरी ठहरी सी क्यूँ [...]

लेखनी. (हिंदी ग़ज़ल)

ईश्वर दयाल गोस्वामी
कर्तव्य का ही बोध , कराती है लेखनी । इस देह को मनुृष्य , बनाती है. [...]

दास्तान-ए-सफ़र-ए-ज़िन्दगानी

अतुल कुमार राय
‘ऋतु’आ चुकी कब की ,‘शीत’अब आयी है। सोचकर समझकर बहुत डरकर भी,लिखने [...]

लहू को उबलने तो दो

अतुल कुमार राय
​मौत का गर बुलावा भी आए तो क्या, फिर न कहना कभी भी संभलने तो [...]

जहर

हेमा तिवारी भट्ट
🏵जहर(एक लघु कथा)🏵 "मनु और मीनू! यहाँ आओ बेटा जल्दी से भगवान जी का [...]

इक महकते गुल ने गुलाब भेजा है…

suresh sangwan
इक महकते गुल ने गुलाब भेजा है एक दो नहीं पूरा सैलाब भेजा है हर [...]

बस यूँ ही

अतुल कुमार राय
तुम रात चाँद की चाँदनी हो,मैं सुबह से पहले भोर प्रिये! मीठी धुन हो [...]

वाकया

अतुल कुमार राय
खुले केश अधरों पर लाली/शोभित बिंदी माथे पर, बंजर जमीं पर मुद्दतों [...]

बेवफा

अतुल कुमार राय
इश्क के दरिया मे/डुबोया हूँ खुद को खुद ही, तन्हाई मे भी रो सकूँ/मिले [...]

माँ

अतुल कुमार राय
ये ओस की बूँदे पत्तों पर,गिर-गिर कर जब ली अंगड़ाई। पलकें जो खुली [...]

विद्यालयों में आग क्यों…

Anil Shoor
आदरणीय प्रबुद्धजन, आत्मीय नमस्कार! इधर..कश्मीर को लेकर, एक ऐसी खबर [...]

हास्य-कविता: गधे से वकील

Radhey shyam Pritam
मास्टर जी पढा रहे थे,एक बच्चे पर चिल्ला रहे थे,अरे मूर्ख पढता नहीं [...]

हमारी प्यारी हिन्दी

हेमा तिवारी भट्ट
🌺🌺हमारी हिन्दी🌺🌺 भाषाओं का मानव जीवन में अपना महत्व है|हमारे [...]

राष्ट्रहित सर्वोपरि!

Anil Shoor
एक कर्मचारी कुछ गलत करे तो विभागीय कार्यवाही..निर्वाचित सरकार के [...]

जो झेलते हैं

हेमा तिवारी भट्ट
जो झेलते हैं,वो जानते हैं, हकीकत को पहचानते हैं, कर्मठ हैं जो जीवन [...]

अंकूर फूटने की आश जग गई थी

मनहरण मनहरण
अहा! कितना अच्‍छा लगा, उनसे मिलकर, बाँट रहे थे ज्ञान, अवसर आ गया [...]

आदर्श शिक्षा-व्यवस्था का त्रिस्तरीय प्रारूप

Anil Shoor
रोजगार सुनिश्चित करने में असमर्थता के चलते शिक्षा के प्रति नई [...]

कविता:किताबें

Radhey shyam Pritam
जब आदमी के हाथ में आती हैं किताबें। तब आदमी को आदमी बनाती हैं [...]

सियासत

pradeep kumar
करे चाहे नहीं कुछ भी, बजा पर ढोल देगी ये। मिलाकर झूठ को सच में, तराजू [...]

किसान भूखा है।

pradeep kumar
किसी की चाहतें प्यासी, कोई अरमान भूखा है। कहीं मजदूर भूखे हैं, कहीं [...]

कोई भूखा नहीं होता।

pradeep kumar
कोई नंगा नहीं होता कोई भूखा नहीं होता। सियासत ने अगर इस देश को लूटा [...]

खुश्बुएँ प्यार की।

pradeep kumar
खुश्बुएँ ये प्यार वाली फिर लुटाने दो मुझे। साख अपने इस वतन की अब [...]

बड़ी मछली

Anil Shoor
_लघुकथा__ बड़ी मछली *अनिल शूर आज़ाद व्यवसायी पिता ने सरोवर के [...]

बच्चों पर दो कविताएं

Anil Shoor
_बच्चों पर दो कविताएं_ *अनिल शूर आज़ाद 1. गोली रो उठता है [...]

वह हंस रहा था

Anil Shoor
_कविता_ वह हंस रहा था *अनिल शूर आज़ाद मै बुरी तरह परेशान था मगर वह [...]