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मानव की मनमानी का

Santosh Barmaiya प्रकृति चिट्ठा खोल रही यहाँ, है मानव की मनमानी का। धूप की तपन, बढ़ती गर्मी, असर है ये बेइमानी का।। उमर कम , झड़ते सफेद [...]

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कौन अरबी फ़ारसी पढ़ कर कभी शायर हुआ

Rakesh Dubey
कौन अरबी फ़ारसी पढ़कर कभी शायर हुआ इश्क़ ने जिसको रुलाया बस वही [...]

प्रश्न पूछते थकते पांव

Laxminarayan Gupta
प्रश्न पूछते थकते पांव कितनी दूर रहा अब गाँव पद चिन्हों पर चलते [...]

इस राह से गुजरते

Yashvardhan Goel
इस राह से गुजरते तुम्हे देखा था कहीं से ये वक़्त वो नहीं है पर में [...]

ईंटों का ढांचा भी घर लगता है…।

Saurabh Purohit
सदियों सा सिर्फ एक पहर लगता है, पानी सादा भी अब तो ज़हर लगता [...]

दिल तो दिल है,समझाने कौन आएगा।

Saurabh Purohit
दिल तो दिल है इसको समझाने कौन आएगा रिश्तों में पड़ी गांठो को [...]

झूला

अंकित शर्मा 'इषुप्रिय'
*मुक्तक* झूलती सखियाँ सयानी, गा रहीं मल्हार। प्रेम के इस राग में [...]

बुढापे का दुख

अंकित शर्मा 'इषुप्रिय'
*दो दोहे* श्रमिक बना सुत ने किया, कितना आज तटस्थ। हाय बुढापे में [...]

ग़ज़ल

sanjeev kuralia
ग़ज़ल आ के इक बार , दिल से न जाये कोई ! किसने [...]

“मीत मेरे” गीतिका

Ankita Kulshreshtha
प्रीति मेरी मीत तेरे नाम है सुबह तुम से ही तुम्हीं से शाम है >> [...]

हम ही होंगे जिम्मेदार

Pushp Lata
"गीतिका" मानवता जिनकी मर जाती , हो जाते हैं वह गद्दार ये आतंकी रूप [...]

बचपन के दिन

Pushp Lata
गीतिका ************************************* लड़कपन का सुहाना वह ,जमाना याद आता है झमाझम [...]

मित्रपाल शिशौदिया “मित्र”

Mitrapal Shishodia
आ गया है क्या जमाना आजकल आदमी झूठा फसाना आजकल कर रहा है वो सितम [...]

हमें कब तलक आजमाते रहोगे

Mahesh Kumar Kuldeep
हमें कब तलक आजमाते रहोगे गिराते रहोगे उठाते रहोगे बचाओगे कैसे [...]

“अधूरी सी कहानी तेरी मेरी – भाग २ “

सन्दीप कुमार 'भारतीय'
"अधूरी सी कहानी तेरी मेरी - भाग - २ " * * * * * * * * * * * * * * * * * पूरे एक महीने का [...]

बुझती मशाल -जलतीं मशालें

Laxminarayan Gupta
परतंत्र-काल में जली देश-भक्ति की मशाल काजल की कोठरी में पारने [...]

वर्चुअल इश्क़

Dinesh Pareek
वर्चुअल इश्क़ उधर तुम चैट पर जल रही होती हो कभी हरी तो कभी पीली और [...]

मैं नेता बनूंगा — कविता— हास्य व्यंग

निर्मला कपिला
मैं नेता बनूंगा एक दिन बेटे से पूछा ;बेटा क्या बनोगे?: कौन सा [...]

वेदना(शहीद की पत्नी)

Ankita Kulshreshtha
1) चूड़ियां रोईं लगा गज़रा सिसकने टूटकर प्रीति की माला भी' बिखरी [...]

हमारा आज ही देखो हमारा कल सजाता है

Dr Archana Gupta
हमारा आज ही देखो हमारा कल सजाता है न वापस लौट कर बीता हुआ यह वक़्त [...]

सम-सामयिक दोहे

Laxminarayan Gupta
सहिष्णु नर होता सफल, पकड़ सबूरी डोर| असहिष्णु नर ढोर सम, चरता चारों [...]

मकान देख रखे है ज़माने वाले।

Saurabh Purohit
कभी तन्हाई में सुध ना लेता था कोई, ये कहाँ से आ गए है हक़ जताने [...]

किस्से पुराने याद आये है।

Saurabh Purohit
आज किस्से फिर पुराने कुछ याद आये है, कुछ तज़ुर्बे है जो फिर लिखाये [...]

मैं सोंचता हूँ दर्द तबस्सुम में लू छुपा।

jameel saqlaini
आते रहे युहीं जो खयालात' कुछ न कुछ" लिक्खेंगे फिर तो हम भी [...]

गुरुवर तुम्हें नमन है

Satish Mapatpuri
जिसने बताया हमको , लिखना हमारा नाम . जिसने सिखाया हमको , कविता ,ग़ज़ल [...]

हिदायत

Anita Mehta
बहारें जब चली जायें ,निगाहें नम नहीं करना गुलों की चाह में खोकर , [...]

ज़िन्दगी

jyotima shukla
तरह-तरह के रंग बदलती है ज़िन्दगी कभी तितली तो कभी गिरगिट लगती है [...]

कब तक पीर छुपाएं सैनिक

अंकित शर्मा 'इषुप्रिय'
*गीतिका* कब तक पीर छुपाएं सैनिक, कब तक रक्त गिरायें। विलखाती [...]

सैनिक शौर्य

अंकित शर्मा 'इषुप्रिय'
*दो मुक्तक* आतंकी की मौत पर, जिसको लगती चोट। आज उजागर हो गया, मन में [...]

“माफ कर दो..” अतुकांत रचना

Ankita Kulshreshtha
मैं..... कल तुम्हारे पीछे तुम्हारे कमरे में गई थी... तुम तो नाराज थे [...]

आखिर कोई क्यू

amod srivastava
आखिर कोई क्यों मुझे पढ़ना चाहेगा????? अपने अमूल्य जीवन का [...]