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वो बेबाक कवि है

Maneelal Patel मनीभाई कभी कल्पना की पर लगाये। कभी भटके को डगर दिखाये। कभी करें हंसी ठिठोली , कभी करें क्रांति की बोली। वह कोई नहीं समाज का उगता रवि है । हां ! वो [...]

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” अपनी अपनी पोथी , अपना अपना भाष ” !!

भगवती प्रसाद व्यास
कम, पढ़े -लिखे गुणी हैं ज्यादा , पढ़े -लिखों ने सब कुछ नापा / संतों की [...]

ग़ज़ल

kalipad prasad
नंदन प्यारा था दुलारा था, सहारा न हुआ मेरा खुद का ही जलाया दिया [...]

नन्हीं गुड़िया

Dr.Priya Sufi
मैं नन्ही सी प्यारी गुडिया मम्मी की दुलारी गुडिया चंदा है मामा [...]

“मैं”

GEETA BHATIA
आखिर ये "मैं" क्या है ? क्या ये अभिमान है या स्वाभिमान है या [...]

बेटियाँ——–“सुन रहे हो बाबा”

नीरजा मेहता 'कमलिनी'
एक बेटी की बात अपने पिता से—- सुन रहे हो बाबा ! जगाये थे जब [...]

बदलती सोच

meenu yadav
बदल रही है सोच हमारी नया नज़रिया आया है … बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ नारा [...]

बेटियाँ——–“सुन रहे हो बाबा”

नीरजा मेहता 'कमलिनी'
एक बेटी की बात अपने पिता से---- सुन रहे हो बाबा ! जगाये थे जब [...]

चल अम्बर अम्बर हो लें..

Sonit Bopche
चल अम्बर अम्बर हो लें.. धरती की छाती खोलें.. ख्वाबों के बीज [...]

मेरी सहेली

विक्रम साही
जिस पिता के संग मे खेली, जिस ने बना कर रखा था अपनी सहेली, उस पिता ने [...]

सच्चा प्यार

रामकृष्ण शर्मा बेचैन
सच्चा प्यार एक कल्पनिक दृश्य प्रस्तुत करते हुये अपनी रचनाओं के [...]

दिखावा

डॉ.मनोज कुमार
इंसान दिखावे में परेशान हैं कोई गाड़ी कोई बगला कोई पैसा दिखाने में [...]

…… गीत ….

Dr. umesh chandra srivastava
.. .... गीत .... देखकर फिर सघन जलधर , विकल बरसे नयन झर- झर । [...]

बेटियाँ

GEETA BHATIA
श्रृंगार रस में जब जब सजती हैं बेटियाँ बड़ी नाजुक सी कोमल सी दिखती [...]

बेटियां..

Saksena Dr.Shipra Shilpi
🌻🌻🌻वेदना के स्वर तितली के संग🌻🌻🌻 काश मै तितली होती उडती [...]

वेदना के स्वर तितलियों के संग

Saksena Dr.Shipra Shilpi
🌻🌻वेदना के स्वर तितलियो के संग🌻🌻 काश मै तितली होती उडती मदमस्त [...]

पुत्रियाँ

अजय कुमार मिश्र
पुत्र की चाहत,हो उसी की बादशाहत हमारे समाज की यही मनोवृत्ति [...]

काँटों पर चलने की तो मेरी फ़ितरत हो गयी

अजय कुमार मिश्र
जब मैं पाया उसको ही सारी राह में बिखरे हुए काँटों पर चलने की तो मेरी [...]

बिटिया : मेरी संजीवनी

Mahendra singh kiroula
मैं सात समुन्दर पार हु रहता हर पल जल थल छू के कहता नेत्र बांध करुणा [...]

कविता

pankaj sharma
कर्जदारी कैसी कैसी... मैं कर्जदार था चार दाने भी मयस्सर नहीं थे [...]

‘ ये बेटियाँ ‘

Shivangi Sharma
खुशनसीब होते हैं वो लोग जिनके , घर में मुस्कुराती हैं बेटियाँ [...]

किस्सा–चंद्रहास क्रमांक–8

गंधर्व लोक कवि श्री नंदलाल शर्मा
***जय हो श्री कृष्ण भगवान की*** ***जय हो श्री नंदलाल जी [...]

बेटिय़ों को भी माँ के कोख में बेफिक्र पलने दो।

Satish Verma
भ्रूण हत्या : कविता ( चतुष्पदी ) मत करो इस धरती को बंजर तुम, तनिक [...]

बेटियाँ

गौरव पाण्डेय
व्यक्ति के निर्माण का आधार अपनी बेटियाँ। स्नेह,ममता,त्याग का [...]

शेर

Pankaj Trivedi
दर्द को ज्यादा तवज्जु देने की आदत नहीं है मेरी मजे से रहो तुम दर्द [...]

ज़िंदगी

Pankaj Trivedi
ज़िंदगी फिल्म की तरह बनती है, सँवरती है, बनतीहै, बिगड़ती है, लोग देखते [...]

शेर

Pankaj Trivedi
मुझे देखकर खनकाती रहती थी तुम चूडियाँ ये क्या हो गया कि खुशियों पे [...]

शेर

Pankaj Trivedi
तुम जानती नहीं कि लौ सी जलती है मेरे अंदर तुम्हीं हो वो बाती जो [...]

शेर

Pankaj Trivedi
मोहब्बत का सरे आम इज़हार न करो बेदर्द ज़माना है खुद का मज़ाक न [...]

कविता

Pankaj Trivedi
हर शाम घर लौटकर आयने में देखकर हमें ही शर्म आने लगें, अपनी आँखों से [...]

शेर

Pankaj Trivedi
खामोश खड़े है हम मगर अकेले नहीं मिलकर रहती है शाखा-प्रशाखाएँ यहीं - [...]