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भगवान की सत्ता में सभी समान

रणजीत सिंह रणदेव चारण निर्धन जग में कोय ना, ना कोई धनवान। प्रभु नजर से देख लों,, आप रूप समान।।२।। महलां अरू झोपड से, मनु में ना कर भेद। प्रभु रचना सब एक हैं,,कर्म [...]

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पाकपरस्ती चीन की….. : दोहे

Ambarish Srivastava
जाति दिखा दी चीन ने, मिले कबूतर बाज. पाकपरस्ती चीन की, जगजाहिर है [...]

कुछ वक्त साथ ले आउँ !!

NIRA Rani
फुर्सत हो तो मैं आउँ कहो तो कुछ वक्त साथ ले आउँ तुम्हे वक्त नही है [...]

मेरे गीत

डॉ मधु त्रिवेदी
मेरे गीत मेरे मन की सुकल्पना सुन्दर शब्दों की चंचल व्यंजना जीवन [...]

पा

डॉ मधु त्रिवेदी
चली ससुराल , पा को रूलाया याद कर , फोन भी मिलाया छोटी थी , ठनका ठनकी [...]

जो सरहद पे जाए …

Ambarish Srivastava
हवाओं में महके कहानी उसी की | जो सरहद पे जाए जवानी उसी की | सभी से जो [...]

ग़ज़ल १

Ambarish Srivastava
बह्र: बहरे हजज़ मुसद्दस महजूफ अल अर्कान: मुफाईलुन मुफाईलुन [...]

जलता हूँ फिर भी नहीं करता

डॉ मधु त्रिवेदी
जल -जल उठता हूँ बार - बार जब से सँभाला होश मैने दावानल की तरह जल रहा [...]

बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक : दशहरा

डॉ मधु त्रिवेदी
आज हर तरफ फैले भ्रष्टाचार और अन्याय रूपी अंधकार को देखकर मन में [...]

मेरी ग़ज़ल जय विजय ,बर्ष -३ अंक १ ,अक्टूबर २०१६ में प्रकाशित

मदन मोहन सक्सेना
प्रिय मित्रों मुझे बताते हुए बहुत ख़ुशी हो रही है कि मेरी ग़ज़ल जय [...]

खुद बोल उठे

डॉ मधु त्रिवेदी
देखी जब इन्साँ की मौका परस्ती दरवाजे खुद ब खुद बोल उठे पहले [...]

दुर्गा माँ

डॉ मधु त्रिवेदी
हर बरस चली आती मेरी दुर्गा माँ कष्ट सभी हर के जाती है दुर्गा [...]

शक्ति

डॉ मधु त्रिवेदी
तू है शत्रुओं का नाश करे दुर्गा माँ तू दुख सबके हरदम हर ले दुर्गा [...]

तुम जो मिलें

डॉ मधु त्रिवेदी
पिया, तुम जो मुझे मिलें जिन्दगी की कश्तियाँ सज गई तुम जो मुझे [...]

तकिया

डॉ मधु त्रिवेदी
खूबसूरत दुनियाँ में आने से पहले माँ का गर्भ ही मेरा मात्र तकिया [...]

नींद हमारी ख्याव तुम्हारे

डॉ मधु त्रिवेदी
अलसाई अलसाई नींद में जब ख्याव तुम्हारा आ जाता है केवल तुम ही तुम [...]

आ जेहन में उतर जाओ

डॉ मधु त्रिवेदी
एकटक ना देखो सच्चाई को आने दो. छोड इस जहां दूसरे जहां को जाने [...]

कभी जिन्दगी में उजाले न होते

बसंत कुमार शर्मा
कभी जिन्दगी में उजाले न होते अगर आप हमको सँभाले न होते नहीं [...]

हो जाते माता पिता ,कोमल कभी कठोर

Dr Archana Gupta
हो जाते माता पिता ,कोमल कभी कठोर बच्चों का जिसमे भला ,ले जाते उस [...]

अर्पित है

डॉ मधु त्रिवेदी
मन समर्पित है मन अर्पित है . लिखने को एक नई मधुशाला. साकी कैसे कैसे [...]

जग जननी कल्याण करो

Rita Singh
आ जाओ माँ धरा पर भी रक्त बीजों ने शीश उठाया है , घात किया है तेरे [...]

ग़जल:- आँखे लाल चहरा उदास आज पढ़ ने ना कोई/मंदीप

Mandeep Kumar
आँखे लाल चहरा उदास आज पढ़ ले ना कोई/मंदीप आँखे लाल चहरा उदास आज पढ़ [...]

दया से हमारा भरो माँ खज़ाना

Dr Archana Gupta
दया से हमारा भरो माँ खज़ाना हमें मात अम्बे कभी मत भुलाना कहीं पाप [...]

*कुछ हाइकु*

आनन्द विश्वास
*कुछ हाइकु* ...आनन्द विश्वास 1. हमने माना पानी नहीं बहाना तुम भी [...]

“खो गये उन्मुक्त दिन “

Dr.Nidhi Srivastava
क्यों खो गये वो उन्मुक्त दिन , बरबस आँखों में उमड़ गये , निज सूने मन [...]

~पहला जवाब~

Vinod Chadha
मत छेड़, मत छेड़, कब से कह रहा था तुमसे बहुत दफा, प्यार से समझाया बड़े [...]

मेरा ठिकाना-5—मुक्तक—डी के निवातियाँ

डी. के. निवातिया
जान लीजिये आज मेरा ठिकाना आपके संग में है वक़्त बिताना दिलबरों की [...]

सबूत मांगने वालों को मिल ही गया मुंह तोड़ जवाब

डॉ सुलक्षणा अहलावत
सबूत मांगने वालों को मिल ही गया मुँह तोड़ जवाब, देखो पीओके वालों ने [...]

कोई आज ..कोई चार दिन बाद

NIRA Rani
जिंदगी जितनी गुजरी है कुछ कमाने मे उससे कहीं ज्यादा गुजरी है बहुत [...]

मेरा ठिकाना-4—मुक्तक—डी के निवातियाँ

डी. के. निवातिया
क्या करोगे जानकर तुम मेरा ठिकाना मैं ठहरा घुमक्कड़ रिवाजो का [...]

मकानों के जंगल

सन्दीप कुमार 'भारतीय'
धराशायी होते जा रहे हैं वृक्ष, उग रहे हैं मकानों के जंगल, उजड़ रहे [...]