II मतदाताओं का अधिकार II

संजय सिंह

रचनाकार- संजय सिंह "सलिल"

विधा- कविता

मतदाताओं का अधिकार ,
बस एक मत पत्र,
चंद बूंद स्याही,
और कुछ वर्षों तक,
मुंह बंद रखने के लिए एक मोहर l

और उसके बाद फिर वही,महंगाई ,
बेकारी, बेबसी और लाचारी का तांडव,
जिसमें अपना अस्तित्व और पहचान ढूंढता,
स्वाधीन देश का स्वाधीन नागरिक l

और दूसरी तरफ मतों की ईटों पर ,खड़ी होती,
प्रजातंत्र के रहनुमाओं की ऊंची हवेलियां ,
और उसमे भौंकने वाले कुत्ते,
ऐसे कुत्ते जो सिर्फ भोंकते हैं l

यह भौंकते हैं पांच वर्षों के अंतराल पर ,
जनता को अपनी उपस्थिति का एहसास,
दिलाने के लिए या उस वक्त ,
जब कभी खतरा नजर आता है ,
इन हवेलियों के ढहने का l

और एक बार फिर मिलता है ,
जनता को उसका अधिकार ,
एक मतपत्र चंद बूंद स्याही और एक मोहर,
साथ में अपनी लाचारी और बेबसी का एहसास l

संजय सिंह "सलिल"
प्रतापगढ़ ,उत्तर प्रदेश l

Sponsored
Views 43
इस पेज का लिंक-
Recommended
Author
संजय सिंह
Posts 114
Total Views 4.3k
मैं ,स्थान प्रतापगढ़ उत्तर प्रदेश मे, सिविल इंजीनियर हूं, लिखना मेरा शौक है l गजल,दोहा,सोरठा, कुंडलिया, कविता, मुक्तक इत्यादि विधा मे रचनाएं लिख रहा हूं l सितंबर 2016 से सोशल मीडिया पर हूं I मंच पर काव्य पाठ तथा मंच संचालन का शौक है l email-- sanjay6966@gmail.com, whatsapp +917800366532

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंं


हिंदी साहित्यपीडिया का फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें और जुड़ें दुनिया भर के साहित्यकारों एवं पाठकों से- facebook.com/groups/hindi.sahityapedia