II दीप उम्मीद का II

संजय सिंह

रचनाकार- संजय सिंह "सलिल"

विधा- गज़ल/गीतिका

मुश्किलें भी मिली चैन जाता रहा l
ठोकरों से सदा जख्म पाता रहा ll

चांद आता रहा और जाता रहा l
दीप उम्मीद का जगमगाता रहा ll

कितनी रातें कटी भोर की आस में l
मन बिना बांसुरी गीत गाता रहा ll

राह मुश्किल रही है सदा प्रीत की l
कांटे चुभते रहे मुस्कुराता रहा ll

अन कहा ही रहा उस से रिश्ता मेरा l
बिन वादे हि वादा निभाता रहा ll

प्रीत की रीत ऐसी हि होती "सलिल" l
जाने वाला हि राह दिखाता रहा ll

संजय सिंह "सलिल"
प्रतापगढ़, उत्तर प्रदेश l

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संजय सिंह
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मैं ,स्थान प्रतापगढ़ उत्तर प्रदेश मे, सिविल इंजीनियर हूं, लिखना मेरा शौक है l गजल,दोहा,सोरठा, कुंडलिया, कविता, मुक्तक इत्यादि विधा मे रचनाएं लिख रहा हूं l सितंबर 2016 से सोशल मीडिया पर हूं I मंच पर काव्य पाठ तथा मंच संचालन का शौक है l email-- sanjay6966@gmail.com, whatsapp +917800366532

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