II तुम पिछली कहानी भूल गए….II

संजय सिंह

रचनाकार- संजय सिंह "सलिल"

विधा- कविता

तुम पिछली कहानी भूल गए,
हम बीते कल में ही अटके हैं l
जाने तुम रस्ता अपना भूल गए ,
या हम अपनी ही राहें भटके हैं l
ऐसे तो कुछ ठीक ना रिश्ते ,
कुछ ना कुछ तो खटके है ll

तुम पिछली कहानी….

इंतजार किया था घंटों सोचा ,
कुछ मुझसे भी वह अब पूछेगा l
बचपन का दोस्त मिले और,
बातें ना हो कोई बचपन की I
गाता रहा वह बस अपनी ही,
मैंने भी कहा अब चलते हैं ll

तुम पिछली कहानी….

ना पूछे वह कोई हाल तुम्हारा ,
और करे बड़ाई बस अपनी ही l
सब कुछ छोड़ा पैसों खातिर ,
वह भी बस जीने भर का ही l
फिर क्या मिलना और कैसी बातें ,
तुम्हारे अपने मेरे अपने रास्ते हैं ll

तुम पिछली कहानी…

दौलत की हम करें गुलामी ,
संबंध ही सारे जैसे भूल गए I
गैरों को अपनाने की बात दूर ,
हम अपनों को ही भूल गए I
त्रिशंकु सी हालत अपनी है ,
बस बीच अधर में लटके हैं ll

तुम पिछली कहानी….

संजय सिंह 'सलिल'
प्रतापगढ, उत्तर प्रदेश l

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संजय सिंह
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मैं ,स्थान प्रतापगढ़ उत्तर प्रदेश मे, सिविल इंजीनियर हूं, लिखना मेरा शौक है l गजल,दोहा,सोरठा, कुंडलिया, कविता, मुक्तक इत्यादि विधा मे रचनाएं लिख रहा हूं l सितंबर 2016 से सोशल मीडिया पर हूं I मंच पर काव्य पाठ तथा मंच संचालन का शौक है l email-- sanjay6966@gmail.com, whatsapp +917800366532
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