II अब तो आजा II

संजय सिंह

रचनाकार- संजय सिंह "सलिल"

विधा- गीत

नवगीत

डूबा डूबा ए मन ,
प्यासे प्यासे नयन,
थक गए हैं कदम,
अब तो आजा lI

ना कर इतने सितम
जी सकेंगे न हम ,
टूटे टूटे सपना,
अब तो आजा lI

सपनों के गांव में,
प्यार की छांव में ,
इस दुनिया से दूर ,
अब तो आजा lI

ओढ़े धानी चुनर,
प्यार की ले गागर,
दिल की सूनी डगर ,
अब तो आजा ll

यह हंसी वादियां ,
तेज हैं आंधियां,
बुझ ना जाए दिए ,
अब तो आजा ll

सावन की छटा ,
घिरी काली घटा,
आधा जीवन चला,
अब तो आजा ll

संजय सिंह "सलिल"
प्रतापगढ़, उत्तर प्रदेश l

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संजय सिंह
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मैं ,स्थान प्रतापगढ़ उत्तर प्रदेश मे, सिविल इंजीनियर हूं, लिखना मेरा शौक है l गजल,दोहा,सोरठा, कुंडलिया, कविता, मुक्तक इत्यादि विधा मे रचनाएं लिख रहा हूं l सितंबर 2016 से सोशल मीडिया पर हूं I मंच पर काव्य पाठ तथा मंच संचालन का शौक है l email-- sanjay6966@gmail.com, whatsapp +917800366532

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