II जीवन की आपाधापी में…..II

संजय सिंह

रचनाकार- संजय सिंह "सलिल"

विधा- गीत

जीवन की आपाधापी में ,
ज्ञान दबा सब कापी मे l
किसे चाहिए ज्ञान यहां पर,
सब पैसो की मापी मे ll

जीवन की आपाधापी में ….

आज के बच्चे होनहार हैं,
हमसे पिज्जा बर्गर मांगे l
अपना बचपन बीता था ,
दस पैसे की टॉफी में ll

जीवन की आपाधापी में ….

एसी में रहकर क्या जानो,
मजा पूस की सर्दी का l
कंबल ओढ़ अलाव तापना,
रातें ठिठुरन भरी रजाई मे ll

जीवन की आपाधापी में ….

बीता समय बताए हमको,
अक्सर ही समझाए हमको l
अब तो जीवन बिक जाता है,
खाली यहां पढ़ाई में ll

जीवन की आपाधापी में ….

भाग-दौड़ का आया जमाना,
हाय हलो मोबाइल पर l
क्या पता रात भर जागे कैसे,
भरें प्रेमरस पाती में ll

जीवन की आपाधापी में ….

संजय सिंह "सलिल"
प्रतापगढ़, उत्तर प्रदेश l

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संजय सिंह
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मैं ,स्थान प्रतापगढ़ उत्तर प्रदेश मे, सिविल इंजीनियर हूं, लिखना मेरा शौक है l गजल,दोहा,सोरठा, कुंडलिया, कविता, मुक्तक इत्यादि विधा मे रचनाएं लिख रहा हूं l सितंबर 2016 से सोशल मीडिया पर हूं I मंच पर काव्य पाठ तथा मंच संचालन का शौक है l email-- sanjay6966@gmail.com, whatsapp +917800366532

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