II आज का गांव II

संजय सिंह

रचनाकार- संजय सिंह "सलिल"

विधा- गज़ल/गीतिका

आज इंसान खुद से हि अनजान क्यों l
रोज मिलते न होती दुआ बात क्यों ll

रह गया गांव का कोई मतलब नहीं l
बैठकों में वो रौनक न अभिमान क्यों ll

आज आती नहीं कोई पाती पिया l
हाथ मोबाइलों की हि मिस कॉल क्यों ll

बाग उपवन भि अब तो वीराने हुए l
गाती अब तो न कोयल मधुर गान क्यों ll

फागुनी भी हवाएं लुभाए न अब l
वो न सावन के झूले फुहारे न क्यों ll

साथ रहता नहीं कोई कुनवा यहां l
गाय- गोबर से घर भी लिपाए न क्यों ll

पेड़ जामुन के होते सभी के रहे l
होरी धनिया के बच्चे भि आए न क्यों ll

आम बिकने लगे खेत बटने लगे l
बाड रिश्तो में कोई लगाएंगे न क्यों ll

संजय सिंह "सलिल"
प्रतापगढ़, उत्तर प्रदेश l

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संजय सिंह
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मैं ,स्थान प्रतापगढ़ उत्तर प्रदेश मे, सिविल इंजीनियर हूं, लिखना मेरा शौक है l गजल,दोहा,सोरठा, कुंडलिया, कविता, मुक्तक इत्यादि विधा मे रचनाएं लिख रहा हूं l सितंबर 2016 से सोशल मीडिया पर हूं I मंच पर काव्य पाठ तथा मंच संचालन का शौक है l email-- sanjay6966@gmail.com, whatsapp +917800366532

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