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Sahitya

प्रीत पर दोहे

Dr Archana Gupta
दोहे 1 हमने अपनी प्रीत पर ,लिखे यहाँ जो गीत सात सुरों में [...]

“बरस जा”

Brijpal Singh
आज कुछ बादल से लगे हैं दूर आसमा पे, शायद मिलेगी राहत हमें इस [...]

” सच ”

Brijpal Singh
न रहा स्वावलम्बी कोई ये भी रीत बरकरार है , मौत ही एक सच है [...]

गर्मी

sudha Singh
सूर्य दहकता आग सा है, धरती जलती तवे सी! इस गरमी के आगे, फेल हुए [...]

” पर्दा “

Brijpal Singh
घर में है जब पर्दा , बाहर क्यों बेपर्दा ....... आखिर इंसान हूँ मै, [...]

जीवन

Dr Archana Gupta
भीड़ के बीच में अकेला सा जीवन भावों के जंगल में खोया सा ये मन [...]

*विधाता छंद*मापनी-1222 1222 1222 1222

Dharmender Arora Musafir
ऐ सुमन मुरझा नहीँ तू मुस्कुराना सीख ले मन चमन घबरा नहीँ तू [...]

जल

sudha Singh
धरा निर्जल सूखा गंगा जल प्यासा मन दुःख भरा [...]

स्त्री

sudha Singh
स्त्री है ये थक नहीं सकती है ये रुक नहीं सकती है ये आये जो कोई [...]

जब तुम नहीं हो (अतुकांत )

Ankita Kulshreshtha
"जब तुम नहीं हो" 󾁆 󾁆 󾁆 󾁆 कल तुम अपनी राह पर जाओगे साथ गुजारा [...]

“रुको नहीं”

Brijpal Singh
लहरें आती है आने दो लहरों को, ढा रही कहरें तो ढा जाने दो कहरों [...]

बाबुल

Suresh Kant Sharma
बाबुल की सोन चिरैया अब बिदा हो चली महकाएगी किसी और का [...]

*प्रेम रतन*

Dharmender Arora Musafir
जग में कायम शान रखिए खुद से भी पहचान रखिए प्रेम रतन को बाँट - [...]

हे प्रिये ! अपना कान लाओ तो जरा…

हरीश लोहुमी
हे प्रिये, ये मेरे हस्ताक्षर की हुईं कुछ खाली चेकें हैं, मेरे [...]

हरदम खेल दिखाये

Dr Archana Gupta
नए ज़िन्दगी देखो हमको हरदम खेल दिखाये अगर हँसाती हमें कभी तो [...]

प्रतीक्षा

Semant Harish
“नींद अटकी रही दरवाज़े पर....... झूलती रही वक्त की खुली सांकल [...]

जिंदगी के उस मोड़ पर

शिवदत्त श्रोत्रिय
कवि:- शिवदत्त श्रोत्रिय जिंदगी के उस मोड़ पर(यह कविता एक [...]

मुक्तक

Rashmi Shrivastav
बने बैठे थे पत्थर से , कभी जो खार मंज़र से , दिवाने बन के निकले [...]

अँगूरी अर्क

Dr Archana Gupta
लड़का लड़की में दिखे ,यहाँ न कोई फर्क दोनों को भाने लगे , खूब [...]

पर्यावरण

Archana Singh
आज विश्व पर्यावरण दिवस पर प्रस्तुत मुक्तक.... दिन-दिन बढ़ता [...]

गीतिका

अंकित शर्मा 'इषुप्रिय'
*गीतिका* शनै: से पुष्प फिर से मुस्कुराया। हवा ने फिर नया [...]

ग़ज़ल।इक आशियाना मिल गया ।

राम केश मिश्र
ग़ज़ल।आशियाना मिल गया । आदमी को खुदा, खुद का ठिकाना मिल गया [...]

जोड़ना

Alok Mittal
जोड़ना ही जोड़ना हमको घटाना ही नहीं। दुश्मन अपने तो कभी कही [...]

छल फरेब

Alok Mittal
टूटता साथ अब बनाना है ! दूरियाँ आज सब मिटाना है ! हो न अब छल [...]

-:मिलन की आहट:-

प्रकाश यादव निर्भीक
मेघा आज सफ़ेद लिबास में चाँद को लपेटकर अभी अभी शाम को अनंत [...]

जीवन सहरा सा हुआ,

Dr Archana Gupta
आज विश्वपर्यावरण दिवस पर जीवन सहरा सा हुआ, दिखे रेत ही [...]

ग़ज़ल।मुझको सिफ़ारिश न मिली ।

राम केश मिश्र
आज तक मेरे प्यार को बेसक गुज़ारिश न मिली । हूँ आंसुओ में [...]

बेवजह गीतिका छल रही है मुझे

Pushpendra Rathore
आज फिर से हवा छल रही है मुझे, महक उसकी अभी मिल रही है मुझे, दूर [...]

कन्टाप !

हरीश लोहुमी
कन्टाप ! ********* -अंकल जी नमस्ते ! -क्या बात है पप्पू ! बड़े [...]

जुगनुओं के खेत में

हरीश लोहुमी
जुगनुओं के खेत में (मुक्तक) **************************************** साँझ होते देख [...]