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Sahitya

के लिए

मधुसूदन गौतम
गजल की शक्ल में कलम घिसाई 212 212 212 212 कौन डरता यहाँ निज कफन के [...]

***लफ्ज***

Dr Meenaxi Kaushik
लफ्जों के ना होते दाँत फिर भी लेते हैं ये काट, दीवारें खडी [...]

मुझे फिर सताने

ashok ashq
मुझे कर इशारे लुभाने लगे है निगाहों से अपने बुलाने लगे [...]

** सच तो सच है **

भूरचन्द जयपाल
सच मैं किसको कहूं जो दिखाई देता है उसे या जो समझ में नहीं आता [...]

कविताएँ

ashok dard
वक्त की हुंकार यह कैसी वक्त की हुंकार मिलती है | हो रही [...]

मोहब्बत पे इतनी निगरानी ठीक नहीं …..

Awneesh kumar
मोहब्बत पे इतनी निगरानी ठीक नहीं ये तुम्हारी इतनी मेहरबानी [...]

!!~ हे गंगा माँ तुझ बिन सब प्यासे ~!!

अजीत कुमार तलवार
अगर तू नहीं तो कैसे बुझेगी प्यास इस जग की तू है तो जिदगी है सब [...]

!! सब की मांग बेटा, बेटी क्यूं नहीं ? !!

अजीत कुमार तलवार
बेटी पैदा होते ही, कुछ प्राणियों को सांप सूंघ जाता है बेटा [...]

!!~ पान और गुटखा बन्द -शराब क्यूं नहीं ?~~!!

अजीत कुमार तलवार
क्यूं ? नहीं लग जाता पूर्णतया प्रतिबन्ध अब शराब के कारोबार [...]

*** जल -बिन मीन ***

भूरचन्द जयपाल
रैन गयी रमता-रमता दिवस भयो परभात जिण मिलना था मिली गया वा [...]

सियासत

Veerendra Krishna
पिछली सरकारों ने लूटा, हम भी छटपटा रहे हैं काम तो कुछ किया [...]

शादियाँ

Veerendra Krishna
लोग़ कहते हैं...... जिसकी जहां लिखी होती है, वहीं होती है [...]

कैसें दिखे स्वराज,हृदय है जब बिन भाव

Brijesh Nayak
भाव बिना गणतंत्र दिन, घटना बना सुजान| गुण गायन कर बीर का, भूले [...]

आह्वान

सुनील पुष्करणा
आह्वान संस्कृति की गात पर डार, द्रुभ, पात-पात पर आज पुनः हम [...]

करो वंदना स्वीकार प्रभो

शिवदत्त श्रोत्रिय
वासना से मुक्त हो मन, हो भक्ति का संचार प्रभो जग दलदल के [...]

!!”योगी का डंडे का जोर”!!

अजीत कुमार तलवार
डंडे में कितना जोर होता है यह देख के बंदा मदहोश होता है चैन [...]

*** तदबीरें जीने मरने की ***

भूरचन्द जयपाल
हरकते-ए-खदीन देखता हूं जब सोचता हूं इफ्तार-ए-दावत रोज रोज़ा [...]

ये गन्दी राजनीति

ज़ैद बलियावी
ये झूटे वादे रहने दो, ये झूटी वर्दी रहने दो,, हम आंसू पीकर भी [...]

***बेटी के दोहे***

Dr Meenaxi Kaushik
**बेटी के दोहे***** 1) बांटें खुशी जहान को,बोले मीठे बोल कन्या [...]

नहीं भटकिए आप, मिलेंगे यम कुछ आगे

Brijesh Nayak
आगे मंदिर कृष्ण का, पीछे आश्रम-धाक| आँगन में फिर भी चले, [...]

संयोग

रजनी मलिक
"मम्मा !मै कुछ नहीं जानती ,आज हमारे ओल्ड ऐज होम को पूरा एक साल [...]

कविता मुश्किल नहीं होती

satyendra kumar
कविता मुश्किल नहीं होती ये कभी मुश्किल नहीं होती . तुम जाना [...]

शहीद दिवस

Tejvir Singh
🙏 अमर शहीदों को शत्-शत् नमन् [...]

माँ और पत्थर

Pushpendra Rathore
आज मिली थी मुझे निराला की वही पवित्रा हां वही जो अभी [...]

रात बीती

Pushpendra Rathore
कल रात बड़ी खुशनुमा थी पूनम का चांद चमक रहा था नीले आकाश में [...]

वे बलिदानी मसताने थे

Rita Singh
राजगुरु सुखदेव भगत सिंह आजादी के दीवाने थे , हँसते हँसते गए [...]

मुक्तक

MITHILESH RAI
मत पूछो अंजाम तेरे जाने के बाद! मैं खुद को ढूँढता हूँ पैमाने [...]

*** मन-मोर ***

भूरचन्द जयपाल
मन-मोर ललचाए किस ओर यह मोर मन जान ना पाए है आतप नहीं ग्रीष्म [...]

II…आजकल बदला ये मौसम…II

संजय सिंह
सोच कर ही वोट दो, या नोट को खर्चा करो l कान से सुन मन गुनो, फिर जा [...]

” कितना और सजोगी ” !!

Bhagwati prasad Vyas
नख से शिख , अलंकरण है ! सजे सजे से , तन मन हैं ! नज़रों से ऐसा [...]