साहित्यपीडिया पर अपनी रचनाएं प्रकाशित करने के लिए यहाँ रजिस्टर करें- Register
अगर रजिस्टर कर चुके हैं तो यहाँ लोगिन करें- Login

अन्य

जवानियाँ प्रणम्य हैं।

pradeep kumar
हमको दिलातीं याद शहीदों की बार बार देश में बनी हैं जो [...]

पुरुषार्थ और परमार्थ के लिए कंचन बनो (प्रेरक प्रसंग/बोधकथा)

Dr. Gopal Krishna Bhatt 'Aakul'
तेजोमय बढ़ी हुई सफेद दाढ़ी से दिव्य लग रहे साधु को देख कर नदी [...]

एक अनोखा दान (नाटक)

Dr. Gopal Krishna Bhatt 'Aakul'
पात्र- 1- श्रीकृष्ण- पाण्डवों के पक्ष में पार्थ अर्जुन के [...]

क्षुद्रिकाएँँ

Dr. Gopal Krishna Bhatt 'Aakul'
दुश्‍मनी ***** दु:स्‍वप्‍न सा भर के गरल आकंंठ दोनों आखों में [...]

पर्दा ना कर

MANINDER singh
पर्दा ना कर, ऐ दिलबर, तेरे हुसन का दीवाना हु, जाने कितनी [...]

लफ्ज़ो की किताब

MANINDER singh
निकल पड़ा, लिए लफ्ज़ो की किताब, जिंदगी के हर दौर का था हिसाब, कुछ [...]

दुर्मिल सवैया :– चितचोर बड़ा बृजभान सखी !! -भाग -2

Anuj Tiwari
दुर्मिल सवैया :-- भाग -2 चित चोर बड़ा बृजभान सखी ! मात्राभार :-- 112 [...]

इत्तफाक

MANINDER singh
दुआओ का मोहताज़ हु, अल्फाज़ो के सुलगते शहर में, मुस्कराहट के दम [...]

मोडर्न इश्क (हास्य रचना)

MANINDER singh
देख आशिक की चिता, इश्क सारी हदे तोड़ता मिला, विरोह की आग में [...]

बीवी

MANINDER singh
पढ़ अख़बार मैंने, बड़ी रोचक जानकारी जुटाई, रह न जाये आप इससे [...]

कलम का कमाल

डी. के. निवातिया
कलम का कमाल क्या कहु इस कलम को जाने ये क्या कर जाए, हाथ लगी [...]

व्यंग

MridulC Srivastava
जीन्स क्यों बिलकुल बुरी बात.. ऐसे हंसते हैं क्या ये कोई तरीका [...]

दुर्मिल सवैया :– चित चोर बड़ा बृजभान सखी – भाग -1 !!

Anuj Tiwari
दुर्मिल सवैया :-- चितचोर बड़ा बृजभान सखी !! भाग -1 मात्रा-भार :-- 112 -112 [...]

**एक नज़्म::इंजी. आनंद सागर**

Er Anand Sagar Pandey
********एक नज़्म******* अब क्या तोहफ़े में दूं तुझको, जो कुछ था पीछे छूट [...]

तुम्हारी तुम जानो

डी. के. निवातिया
तुम्हारी तुम जानो तुम में हम और हम में तुम हो पल भर तो दिल [...]

होली छंद | अभिषेक कुमार अम्बर

Abhishek Kumar Amber
हाय रे ! ये माह फ़ाग दिल में लगाये आग, गोरियों को देख प्रेम उमड़े [...]

पहन के कोट पेंट(छंद) | अभिषेक कुमार अम्बर

Abhishek Kumar Amber
पहन के कोट पेंट तन पे लगा के सेंट, बनकर बाबू सा में चला ससुराल [...]

रावण

डी. के. निवातिया
रावण हर वर्ष जलाते है हम सैकड़ो रावण के पुतले क्या जाने कब [...]

आओ ऐसे मनाये दिवाली

डी. के. निवातिया
आओ ऐसे मनाये दिवाली आओ सब मिलकर हम ऐसे मनाएंगे अब [...]

मनोविनोद

डी. के. निवातिया
मनोविनोद क्या कहे जमाने के हाल यंहा पर खुदा की खुदाई हमने [...]

दिखावे का दौर

डी. के. निवातिया
दिखावे का दौर दिखावे का दौर प्रदर्शन अभिनय दिखावे का आया [...]

!!!—क्यों छोड़ा था तूने अपना ये गाँव जरा लिखना–!!!

डी. के. निवातिया
!!!—क्यों छोड़ा था तूने अपना ये गाँव जरा लिखना–!!! शहर जाकर ऐ [...]

आनदं की खोज मैं

डी. के. निवातिया
क्यों जूझ रहा इंसान आनदं की खोज मैं, गवाँ बैठा है होश दुनिया [...]

जिन्दगी

Neeraj Purohit
विधा - मनोरम छंद मापनी - 2122 2122 तुकान्त - (1) एली, अते (2) एरा, आगे (3) [...]

यथार्त व्यंग—उल्लू का मन जीत लिया

राजकिशोर मिश्र 'राज' प्रतापगढ़ी
यथार्त व्यंग ========= मात्रभार /१६-१४ देख जमाने की आदत को , राज [...]

-1-

सन्नाटे और चुप्पियों के द्वार पर मेरी छाती की धड़कनें बच बच [...]

शारदे स्तुति में एक कवित्त छंद

कवि शिवम् कुमार 'आजाद'
शारदे स्तुति में एक छंद :::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::: विनती करूं मैं आज [...]

खौफ ……….

डी. के. निवातिया
खौफ ………. खौफ नही मुझे अपने दुश्मन का, उससे निपटना के गुर हमे [...]

तुम्हारी अहमियत

Amaresh Mishra
मत पूछा करो हमसे. कि तुम मेरे लिए क्या हो..? दिल के लिए धड़कन [...]

व्यथा

Amaresh Mishra
सूखे पत्तोँ की तरह बिखरा हुआ था मैँ, किसी ने समेटा भी तो केवल [...]