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मुक्तक

जब कभी भी जबां फिसलती है

Kapil Kumar
जब कभी भी जबां फिसलती है होती अक्सर ,हमारी गलती [...]

खुद पे ही इक ये अहसान किया है किया है मैने

Kapil Kumar
खुद पे ही इक ये अहसान किया है मैने खुद को खुद से ही अंजान किया [...]

मुक्तक—विजय पर्व—डी के निवातिया

डी. के. निवातिया
*----विजय पर्व ----* पूजा, भक्ति, ज्ञान, ध्यान में था वो देवो का ख़ास [...]

दश हरा

Vivek Chauhan
ख्वाब को बिस्तर से उठा कर के सो जाओ नेता को भी आँख दिखा कर के [...]

इक रेशमी रुमाल

Kapil Kumar
दीवाना कर गया मखमली सवाल आपका था वो हक़ीक़त या फिर इक ख्याल [...]

मेरा ठिकाना-८ –मुक्तक—डी के निवातियाँ

डी. के. निवातिया
दरख्त मिटे गए मिटा परिंदो का आशियाना खेत खलिहानों को मिटा, [...]

आपके दिल की दास्तान है शायद

Kapil Kumar
कायनात भी मेहरबान है शायद इश्क़ भी आज मेहमान है [...]

कभी तो अंधी आँखों में उजाला होगा

Kapil Kumar
जब आँखों में उसने अँधेरा पाला होगा आकर फिर सहेलियों ने [...]

किसी के दिल की जबां हिचकियाँ बोल रही है

Kapil Kumar
किसी के दिल की जबां हिचकियाँ बोल रही हैं एक अहसास की हवा [...]

रूह का हिस्सा

preeti tiwari
आंख के आंसू है......दरिया नहीं जो सूख जायेगा तुम उतार [...]

मेरा ठिकाना-७—मुक्तक—डी के निवातिया

डी. के. निवातिया
तेरे दिल के खंडहर में पड़ा है फटा-टुटा बिछाना कल होते थे जहाँ [...]

चाहे जितने हो खूबसूरत

Kapil Kumar
रोशन हो गैर जिससे वो शमा जलाता कौन है अगर हो गम बेपनाह फिर [...]

‘ मधु-सा ला ‘ चतुष्पदी शतक [ भाग-1 ] +रमेशराज

कवि रमेशराज
चतुष्पदी -------1. नेताजी को प्यारी लगती, केवल सत्ता की [...]

‘ मधु-सा ला ‘ चतुष्पदी शतक [ भाग-2 ] +रमेशराज

कवि रमेशराज
चतुष्पदी--------26. बेटे की आँखों में आँसू, पिता दुःखों ने भर डाला [...]

‘ मधु-सा ला ‘ चतुष्पदी शतक [ भाग-3 ] +रमेशराज

कवि रमेशराज
चतुष्पदी--------51. त्याग रहे होली का उत्सव भारत के [...]

‘ मधु-सा ला ‘ चतुष्पदी शतक [ भाग-4 ] +रमेशराज

कवि रमेशराज
चतुष्पदी--------76. आज हुआ साकार किसतरह सपना आजादी वाला, आजादी के [...]

अहसास काफी नहीं

डॉ मधु त्रिवेदी
बस तेरे होने का अहसास काफी नहीं मुझको छू लेने को क्षण खास [...]

देख रहा होगा

डॉ मधु त्रिवेदी
देख रहा होगा जहाँ के हालात कोई फरिश्ता जुल्म मिटाने को कभी [...]

हमारा ही घर खूब….: मुक्तक

Ambarish Srivastava
मज़हब से मुल्कों को बाँटा तुम्ही ने. चुभाया बदन में ये काँटा [...]

मेरा ठिकाना -६—मुक्तक—डी. के. निवातियाँ

डी. के. निवातिया
हर किसी का होता है जहान में एक ठिकाना राहे भले हो जुदा-जुदा [...]

असहिष्णुता किधर है…:मुक्तक

Ambarish Srivastava
त्यौहार में मजा ले, कुछ ख़ास काट डाला, बक़रे का नाम देकर, फ्रिज [...]

छटपटाता कसमसाता ….:मुक्तक

Ambarish Srivastava
मथुरा के जवाहरबाग़ काण्ड में शहीद जवानों के प्रति [...]

आपा खोया रँगरूटों नें …मुक्तक

Ambarish Srivastava
बरस रहा बारूद, बाग़ में, बचे, छुपे, संज्ञान लिया, अधिकारी की देख [...]

स्नेह और नीर …..:मुक्तक

Ambarish Srivastava
स्नेह से नीर मित्र भारी है किन्तु इनकी सदा से यारी [...]

पर पंक्षी के पंख नोचता…:मुक्तक

Ambarish Srivastava
जेठ मास में भीषण गर्मी लू घातक बीमारी है. सूखे ताल-तलैया [...]

‘सैनिक मत बलिदान करें!’…: मुक्तक

Ambarish Srivastava
महारथी हैं सत्ता के जो जागें, सुधरें, ध्यान धरें. सबसे ऊपर देश [...]

मित्र के प्रति : मुक्तक

Ambarish Srivastava
कवि मित्र डॉ० मनोज दीक्षित के प्रति.... प्यारे भ्राता पिंगल [...]

उत्तराखंड त्रासदी २०१६ पर मुक्तक:

Ambarish Srivastava
दिनांक ०२-०७-२०१६ आपदा का हो प्रबंधन, यदि उचित सरकार [...]

नजरे भी मिली यूं नजर से

Kapil Kumar
नज़रे भी यूं मिल आई हैं नज़र से ख़बरे भी जैसे मिली हो बेखबर [...]

भारतीय सेना के सम्मान में दो मुक्तक

Ambarish Srivastava
माँ से बढ़कर अपनी धरती हमको प्यारी मोदीजी. व्यर्थ नहीं हो एक [...]