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मुक्तक

मुक्तक

MITHILESH RAI
तुम मेरी जिन्दगी की तस्वीर हो! तुम मेरी मंजिलों की तकदीर [...]

कभी भला तो कभी बुरा लगता है

सागर यादव 'जख्मी'
कभी भला तो कभी बुरा लगता है वो सारी दुनिया से जुदा लगता [...]

टूटकर बिखरने का हौसला नहीँ है

सागर यादव 'जख्मी'
मुझे आपसे कोई गिला नहीँ है मेरी किस्मत मेँ ही वफा नहीँ [...]

पागल

सागर यादव 'जख्मी'
रात -दिन मेरे जीने की दुआ करती है वो लड़की अपना फर्ज अदा करती [...]

चार मुक्तक

मधुसूदन गौतम
मै तुमको जीने की कला एकसिखलाता हूँ। अकिंचन हो जाने की राह [...]

फूल-सम हर हाल पर/ प्रीति हिंदुस्तान बन

Brijesh Nayak
(1) फूल-सम हर हाल पर ........................... द्वंदमय जग-डाल पर, ज्ञान-कंटक [...]

मुक्तक

MITHILESH RAI
कभी जिन्दगी खुशी का पैगाम देती है! कभी जिन्दगी ख्वाबों का [...]

भाव, सघन चेत का/ फूल हँसें एक बन

Brijesh Nayak
(1) भाव,सघन चेत का ..................... फूल,शुष्क खेत का| गम न कभी रेत का| [...]

** दुःख किण सूं कहूं साजना **

भूरचन्द जयपाल
दुःख किण सूं कहूं साजणा दिन गिणतां रातां गिणी सुपणा अब सब [...]

“ख्वाब “(प्रतीकात्मक मुक्तक)

ramprasad lilhare
"ख्वाब" (प्रतीकात्मक मुक्तक) रात रूपी बगीची में ख्वाब [...]

हमारे गंदे कर्मोँ की समीक्षा अब नहीँ होती

सागर यादव 'जख्मी'
हमारे गंदे कर्मोँ की समीक्षा अब नहीँ होती कि पहले की तरह [...]

न शरमाएँगे दुनिया से

सागर यादव 'जख्मी'
न शरमाएँगे दुनिया से सुबह को शाम कह देँगे जो नफरत के पुजारी [...]

वफा का नाम सुनकर भी हमारा खून जलता है

सागर यादव 'जख्मी'
कभी पंजाब जलता है कभी रंगून जलता है सियासी आग मेँ देखो ये [...]

कहीं से न पौन है|/परम देश भक्त बन|

Brijesh Nayak
(1) कहीं से न पौन है ....................... ज्ञान की सु गोन है| सहज और मौन है| [...]

मुक्तक (डॉ. विवेक कुमार)

Dr. Vivek Kumar
जीत की न हार की बात केवल प्यार की, आप साथ हो अगर क्या पड़ी [...]

** चलन है प्यार में रुसवाई का ***

भूरचन्द जयपाल
पिघलती है बर्फ तो पिघलने दे सुलगती है आग तो सुलगने दे दिल [...]

दीदारे दिल

सगीता शर्मा
मुक्तक. दीदारे दिल सुनो दीदार दिलवर का. हमें हर शाम करना [...]

मुक्तक

MITHILESH RAI
कई बार सोचता हूँ आखिरी बार तुमको! कई बार देखता हूँ आखिरी बार [...]

घर याद आता है माँ

राहुल आरेज
👪घर याद आता है माँ 🏡 सब छोड जाते वक्त के साथ पर माँ की वह [...]

घर

राहुल आरेज
घर बचपन की आँख मिचोली को अपने आगोश मे लिपेटे याद आता है घर [...]

निज उर-तकदीर पर

Brijesh Nayak
रो मत जग-पीर पर| सुबुधि, ज्ञान-तीर कर| आत्म-सुख लिखो स्वयं| [...]

“टाईमपास “(मुक्तक)

ramprasad lilhare
"टाईमपास " (मुक्तक " एक लड़के ने एक लड़की से कहा मैं प्यार [...]

फूल हूँ

Brijesh Nayak
नेह-रूप चूल हूँ | आनंदी मूल हूँ | जागरण-सु तूल बन | हसूँ, क्यों [...]

दिल का परिंदा

Radhe Tomar
मेरे दिल का आज़ाद परिंदा,मोहबत की गली में भटक गया हैं किसी की [...]

मुक्तक

MITHILESH RAI
हम हँसते हुए जीते हैं कभी रोते भी! हम मंजिल को पाते हैं कभी [...]

मुक्तक

MITHILESH RAI
कई बार वक्त का मैं निशान देखता हूँ! कई बार मंजिलों का श्मशान [...]

“माँ की महिमा “(गेय मुक्तक “

ramprasad lilhare
"माँ की महिमा " (गेय मुक्तक " मुसीबत गर कोई मुझ पर, आये तो मैं [...]

** चुपचाप **

भूरचन्द जयपाल
जख़्म सहते रहे जो मुहब्बत में सब चुपचाप देश के वास्ते [...]

परिंदा

रवि रंजन गोस्वामी
अभी दिन है तो,रात भी जरूर आयेगी । चाँद तारों से, मुलाक़ात भी हो [...]

चाँद ने फिर आज देखो

Dr Archana Gupta
ओट में खुद को छिपाया चाँद ने फिर आज देखो रात का घूँघट उठाया [...]