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मुक्तक

मुक्तक

MITHILESH RAI
तेरी आँखों में झील सी गहरायी है! तेरी अदाओं में कैद अंगड़ायी [...]

*** निजभाषा सम्मान ***

भूरचन्द जयपाल
एक उम्मीद है जगाई निजभाषा सम्मान हिंदी हिन्द की पहचान है [...]

____ * स्वावलंबन * _____

Ranjana Mathur
किसी की भी चाहत अधिक न करो। अपने रास्ते खुद तय करो।। इस [...]

*** बयां करना मुश्किल है ***

भूरचन्द जयपाल
ये अल्फाज़ो से बयां करना मुश्किल है ये रिश्ता दोस्ती का [...]

मानवता

पं.संजीव शुक्ल
पंक्षी कलरव करते थे निशदिन कैसे बागों में। रिश्ते भी पिरोये [...]

मुक्तक

Bikash Baruah
भगवान् को खोजे मंदिर में अल्लाह को खोजे मस्जिद में, पर [...]

मुक्तक

MITHILESH RAI
तेरे बिना मेरी जिन्दगी कटेगी कैसे? तेरे बिना मेरी तिश्नगी [...]

“मन की खिड़की”

राजेश
यह कोई कविता नहीं;मन से निकली आनायास एक आवाज़ है जो मन से [...]

मुक्तक

MITHILESH RAI
तेरा ख्याल क्यों मुझको आता ही रहता है? तेरा ख्याल मुझको [...]

खामोशियाँ मेरी

विवेक दुबे
कहती हैं बहुत कुछ ख़ामोशियाँ मेरी । उतर कर तन्हाइयों में [...]

दोस्ती

Pritam Rathaur
तस्वीरी अहसास दोस्ती अब अदू भी निभाने लगे लग रहा अम्न के [...]

मुक्तक

MITHILESH RAI
शामें-गम को तेरे नाम मैं करता हूँ! दर्दे-तन्हाई को सलाम मैं [...]

मुक्तक

MITHILESH RAI
कुछ लोग खुद को तेरा दीवाना कहते हैं! कुछ लोग खुद को तेरा [...]

*** मत सोच ***

भूरचन्द जयपाल
मत सोच अपनों के बारे में इतना पोच चलते चलते जब पांव में आ [...]

मुक्तक

MITHILESH RAI
अधूरा सा हूँ मैं तेरे नाम के बिना! तड़पाती यादों की सुबह शाम [...]

मेहरबान …

sushil sarna
मेहरबान ... ज़मीं बदल जाती है आसमान बदल जाते हैं l ...हवाओं के [...]

मुक्तक

MITHILESH RAI
खुद की तरह जीने का जूनून रखता हूँ! दिल में अरमानों का मज़मून [...]

दो रचनायें प्रकाशनार्थ

राजेश
दो रचनायें पाठकों के सम्मुख हैं।प्रतिक्रिया [...]

कश्तियाँ …

sushil sarna
कश्तियाँ ... हौसला करते न वो ग़र होती खबर तूफ़ान की l पंखों से [...]

“आँसू”

aparna thapliyal
आँसुओं की अपनी ही जुबान होती है, हर आँसू के दिल में छिपी इक [...]

मुक्तक

MITHILESH RAI
कैसे मैं भूलूंगा तेरे अफसाने को? दर्द बेशुमार हैं मुझको [...]

गुरू वन्दना

डॉ गोरख प्रसाद मस्ताना
गुरू वन्दना राम बलराम श्री कृष्ण को पढाई जिन्ही तिन्हि के [...]

*** मुझे आना पड़ा ***

भूरचन्द जयपाल
भीड़ से हम दूर थे बहुत पर भीड़ में आना पड़ा होकर मज़बूर जो तेरे [...]

शिक्षक दिवस पर कुछ विधाता छंद पर मुक्तक

Dr Archana Gupta
1 किताबी ज्ञान ही केवल, नहीं शिक्षक सिखाता है कमी अच्छाई [...]

मुक्तक

MITHILESH RAI
आज भी तेरे लिए हम यार बैठे हैं! तेरी चाहत में गिरफ्तार बैठे [...]

मुक्तक

MITHILESH RAI
तेरी तस्वीर को सीने से लगा रखा है! तेरी चाहतों को पलकों में [...]

मुक्तक

Dr.rajni Agrawal
मुक्तक ख्वाब में आकर हमारे यूँ सताना छोड़ दो। हम तुम्हारे [...]

मुक्तक

MITHILESH RAI
तेरी तस्वीर को सीने से लगा रखा है! तेरी चाहतों को पलकों में [...]

मुक्तक

Dr.rajni Agrawal
मुक्तक सजा कर प्रीत के सपने लिए तस्वीर बैठे हैं। इबादत में [...]

मुक्तक

Brijpal Singh
गाँव के घरों में अब ताले नज़र आते हैं जंगल के जानवर रखवाले [...]